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मशकूर मुसाफ़िर

इंसान होने का सफ़र,
और उसका असर
हर ज़ज्ब करती नज़र से
हर मुस्कराहट से
खुले दिल और
फ़ैली हुई बाँहों से

खेल है ये बच्चों का
कहने को कुछ नहीं
करना ही उनका कहना है,
कुछ उम्मीद से

मेल खायेंगे हमारे इरादे
और हरकतें,
ओ' इस के लिए हम मशकूर हैं!







We travel to become human
and human we become
with every glance
with every smile
with open heart 
and welcome arms

It is indeed a child’s play
for they need not say
they show the way
believing we may


Unite in our intention
and action,
for that we are grateful

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