नया साल आया है,
लेकर वहीं पुराना सवाल आया है?
मणिपुर, गाजा, सूडान, का ख़्याल आया है,
देहरादून में त्रिपुरा की हत्या का बवाल आया है,
सेंगर के बलात्कार का नया हाल आया है?
वोट चोरी का क्या कोई निकाल आया है?
उमर की बेल को कोई मिसाल आया है?
जज साहेब बिके हुए हैं,
सत्ता नरभक्षी है,
कलेक्टर सारे डरे हुए हैं,
विपक्षी अपनी गद्दियों में धंसे हुए है,
पत्रकार सब दरबारी बने हुए हैं,
सरकार के इश्तहार बने हुए हैं!
आप और हम बॉटल में सड़ता अचार हुए हैं!
हिंदुत्व का चरम है,
और इसका कैसा मर्म है?
मुसलमान इंसान नहीं?
दलित का कोई संज्ञान नहीं?
औरत इज्ज़त है,
लूटने वाला सामान! नहीं?
झूठ का बोलबाला हो,
सच जैसे भुलावा हो,
तारीख़ बदली जाएगी,
भगवा इबारत आएगी,
बाकी रंग शहीद होंगे,
राम के सारे ईद होंगे!
फिर भी साल मुबारक हो,
देखिए वह जो पसंद हैं,
धागा किसी का हो,
आपकी पतंग है!
अच्छा है इतनी उमंग है,
सबका अपना ढंग है,
अपनी अपनी पसंद है,
हम(मैं भी) क्या करें,
जो करोड़ की मुट्ठी तंग है,
कपड़े उनके पैबंद हैं,
सारे फीके रंग हैं!
मुबारक 2026 मुबारक







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