एक और शनिवार,
ख़ास फिर एक बार,
बार-बार की खलबलाहट से,
हँसी खुशी की बुदबुदाहट से,
साथ जाकर, हाथों–हाथ पाकर
गुजरे हुओं की समझ पाकर,
स्वस्थ होते, दुरुस्त होते
ये जरूरी है कि,
अनहोनी के सदमों की तमाम परतें,
पीढ़ी दर पीढ़ी रिसते
ज़ख्म में बंधे हुए रिश्ते,
और ऊपर से सियासती बदी,
बोझ बन छोटे कंधों को,
कम बेदम करती है..

आज फिर हम साथ हुए,
खेल से मज़ाहमत करने,
साथ की सांसे भरने,
उम्मीद सांझा हुईं,
दर्द को मिटाने नहीं,
दूर करने, साथ चलने
जिंदगी का जश्न,
फैलते दायरे
दर्द याद बने
और हम सब आबाद!
खेल खेल में!!
(श्रीलंका में हम सिंधुजा के साथ पिछले कुछ सालों से प्ले फॉर पीस का काम कर रहे हैं. खासतौर से पिछले 2 सालों से. हाल ही में ही तूफानी बरसात से श्रीलंका में काफी बर्बादी फैलाई। जानमाल की, जैसा कि दुनिया में हमेशा बोला जाता है। पर ऐसी आकस्मिक हुई विपदाओं से पैदा हुई दिमागी परेशानी अक्सर जानमाल का ध्यान रखने में नजरअंदाज हो जाती हैं।
ऐसे में सिंधुजा और उनके सहभागी तारका ने एक रिलीफ कैंप में जाकर बच्चों के साथ हर हफ्ते "खेल से मेल" के "शांति का अभ्यास सत्र" लेना शुरू किए.
सिंधुजा की फेसबुक पोस्ट और उसका ये हिंदी भाषा रूपांतर उस पृष्ठभूमि में है!


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