हुजूर भी हैं हम जीहुजूर भी हैं,
पास हैं चाहे कितने दूर भी हैं!
मंजूर भी हैं, नामंजूर भी हैं,
अपनी खुशी से मजबूर भी हैं!
कमजोर भी हैं और शूर भी हैं,
बदलते लम्हों के मशकूर भी हैं!
काबिल हैं दोनों अपने आप के,
जरूरत नहीं फिर जरूर भी हैं!
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बेअदबी के कायल हैं दोनों,
अपनी गुस्ताख़ी के शु'ऊर भी हैं!
मलहम हैं तो नासूर भी हैं,
इंसाँ हैं मखमली काफ़ूर नहीं हैं!

शराफ़त नहीं है इस रिश्ते में,
आम हैं हम खजूर नहीं हैं!
मंज़िल नहीं रास्ते हैं रिश्ते,
हमसफर हैं जन्नत जरूर नहीं हैं!
साथ है यही मुकम्मल बात है,
करवा की मंगल सूत्र नहीं है!
बनी है वही बात जो बिगड़ी है,
जेहन का क्या जज़्बात नहीं हैं?



Shandar
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