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स्त्रीधन

बचपन से हमको सिखाया है, 
लड़की हमारी संपत्ति है,
और पराया धन, हमारी इज्जत,
दुनिया बड़ी बुरी है, मर्दों कि नज़र छुरी है, 


चारदिवारी बड़ी है,
यही आपकी जिंदगी कि धुरी है,
अब ये आपकी किस्मत है
अगर आपके भाई-भतिजों या
चाचा-ताऊ कि नीयत बुरी है!
तसल्ली रखिये,
घर की बात घर है,
बड़ों की इज्जत-छोटों को प्यार
यही है हमारे संस्कार,
जो हमें सिखाते हैं,
बेटियों का तिरस्कार,
पतियों का व्यभिचार
माँ लाचार, अनकंड़ीशनल प्यार,
कोई बात नहीं बेटा, दिल ही तो है,
फ़िर मत करना बलात्कार,
हम तुम्हारे लिये ले आयेंगे,
अनछुई, छुई-मुई, गोरी-चिट्टी,
एक अबला,
बॉटल में अचार,
खोलो, चखो,
खाने में नरम, बिस्तर गरम,
घर हमारा मंदिर है दिन में
और रात को हरम,
परिपक्व है हमारा समाज़, पुरुष-प्रधान है,
स्त्री हमारा खर्चा है, (कन्या) दान हैं,
जी भर के करते हैं, मर्द
कितने महान हैं!

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