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#MeToo

अपने लिखें #MeToo तो दर्द होता है,
कुछ की आँखे खुली हैं,
भट्टा सी?
कहाँ रहते हैं मर्द दुनिया के?
अपनों के साथ रहते रहते
भूल जाते हैं, सब,
अपने गरेबां को,
उन हाथों को जो मचलते हैं,
थे?
जब आप मौका थे,
और आपके हाथ, कंधे, कोहनी चौका?
भीड़ में,
आपकी आँखें झांक रही थीं,
उपर से, और
ताक रही थी,
शर्म को बेशर्मी से,
क्या करें
फ़ुर्सत ही नहीं मिलती,
ज़ेब की गरमी से,
अपने हाथ कब तक होंगे
जगन्नाथ?
रगड़ दो कहीं हाथ,
हो गयी पूरी 'मन की बात'
और खुजली भी कम,


अगर आप सचमुच के,
दिल के दर्द वाले मर्द हैं,
तो लिखिए #MeToo
अगर आप के भी हाथ कभी सटे हैं,
भीड में आप भी कभी,
जाने-अंजाने एक धक्के में बहे हैं,
और नर्म-मुलायम कुछ तो छुए हैं?


लिखिए #MeToo अगर,
आपके भी ऐसे जिगरी यार हैं,
जिनके सड़कछांप प्यार हैं,
जिनके हाथ की सफ़ाई के
किस्से मशहूर हैं,
उनकी हिम्मत की आप दाद देते हैं,
और थोड़ा शर्माकर उनसे
वो तस्वीरों वाली किताब उधार लेते हैं?
चिंता नहीं होती आपको,
क्योंकि आपकी बहन उनकी भी बहन है!


लिखिए #MeToo अगर आपने
हज़ारों बार,
छेड़छाड़, एसिड, दबोचने, नोंचने,
जबरन पकड़ने, मसलने,
बलात्कार की खबरें पड़ी हैं,
और बात वहीं खत्म हो गयी,
"दुनिया में बहुत बुराई है"
"बहुत महंगाई है"
और वैसे भी रोज एक नयी सुबह है,
और ऑप्टिमिस्म जरूरी है,
वैसे भी वो आपकी मां-बहन, बेटी-बीबी,
रिश्ते पहचान, जात-धर्म की नहीं थी,
इसलिए #MeToo वाली फ़ीलिंग ही नहीं आयी!

#MeToo #MeToo #MeToo

आप भी एक वज़ह हैं,
जी हाँ आप
#YouToo #YouToo #YouToo




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