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कमल की कीचड़!

हाल बताते हैं कि हालात क्या होंगे!
लातों के भूत से सवालत क्या होंगे!

माना छप्पन का सीना, पर खोखला है,
ये आदमी पूरा का पूरा ढकोसला है!

छप्पन का सीना है, कि कोई बड़ा कमीना है,
ईलेक्शन का महीने में अब बीबी को चीना है!

अगर करते हप अपनी बीबी से प्यार
तो मोदी सरकार से करो इनकार !

नाम बेचते हैं अपना और अपने ही गुण गाते हैं,
कैसी भूख है कि अपनी शरम बेच के खाते हैं!

कलयुग कहते हैं कमल से कीचड़ बहती है,
सिरफ़िरी दुनिया उसे मोदी कहती है!!

नाम नरिंदर, सीना धरमिनदर, मूँ मिंया मिठ्ठू है,
शेर की खाल में छुपा भेड़िया संघ का ट्ट्टू है!

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