सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

जय श्री राम!

घर में सबको भगवान चाहिए,
मंदिर का रास्ता आसान चाहिए,
पैसे से मिलते है दर्शन,
फिर किसको लंबी लाइन चाहिए!





लोग मक्खी की तरह फिरते हैं,
पहले घर को सामान चाहिए,
कौन तपस्या करे, और तीर्थ पैदल करे,
जन्नत के लिए अब विमान चाहिए!

सीधी ऊँगली से नहीं मिलता,
तरीका सबको शैतान चाहिए।
कोई और करे तो बुरी बात है,
किसको अपनी तरफ ध्यान चाहिए!

टीवी सीरियल बन रही है ज़िन्दगी,
सुनने को दिल की बातें 2 एक्सट्रा कान चाहिए,

हर गली में मंदिर, हर पूजा पंडाल,
जहाँ मर्जी कचरा, हर दीवार मूत्रपीकपान,
बस उतना आसान भगवान चाहिए!
किसने देखा है कितनी मुश्किल आसान?
हो रहा है बस इतना सबको भान चाहिए!

जो समझ सकते हैं सच्चाई वो बच्चे हैं,
उनके दिमाग में सेंध लगानी है,
अब तक मान्यता की बातें होती थीं,
अब भगवान को विज्ञान चाहिए!!

भगवान की क्या औकात
हाथी को श्रीगणेश करें,
प्लास्टिक सर्जन कोई उस टाईम चाहिए!
प्रभु की क्या जुर्रत की जमीन आसमान करें,
इंजीनियर का बनाया पुष्पक विमान चाहिए!
कुछ नया नहीं है दुनिया में, हमेशा होता आया है,
अंधभक्ति को मूरख इंसान चाहिए!
जय श्री राम......देव, आसा, रवि, शंकर,


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

2026 वही पुराना नया साल!

नया साल आया है, लेकर वहीं पुराना सवाल आया है? मणिपुर, गाजा, सूडान, का ख़्याल आया है, देहरादून में त्रिपुरा की हत्या का बवाल आया है, सेंगर के बलात्कार का नया हाल आया है? वोट चोरी का क्या कोई निकाल आया है? उमर की बेल को कोई मिसाल आया है? जज साहेब बिके हुए हैं, सत्ता नरभक्षी है, कलेक्टर सारे डरे हुए हैं, विपक्षी अपनी गद्दियों में धंसे हुए है, पत्रकार सब दरबारी बने हुए हैं, सरकार के इश्तहार बने हुए हैं! आप और हम बॉटल में सड़ता अचार हुए हैं! हिंदुत्व का चरम है, और इसका कैसा मर्म है? मुसलमान इंसान नहीं? दलित का कोई संज्ञान नहीं? औरत इज्ज़त है, लूटने वाला सामान! नहीं? झूठ का बोलबाला हो, सच जैसे भुलावा हो, तारीख़ बदली जाएगी, भगवा इबारत आएगी, बाकी रंग शहीद होंगे, राम के सारे ईद होंगे! फिर भी साल मुबारक हो, देखिए वह जो पसंद हैं, धागा किसी का हो, आपकी पतंग है! अच्छा है इतनी उमंग है, सबका अपना ढंग है, अपनी अपनी पसंद है, हम (मैं भी) क्या करें, जो करोड़ की मुट्ठी तंग है, कपड़े उनके पैबंद हैं, सारे फीके रंग हैं! मुबारक 2026 मुबारक

साफ बात!

  रोशनी की खबर ओ अंधेरा साफ नज़र आता है, वो जुल्फों में स्याह रंग यूंही नहीं जाया है! हर चीज को कंधों पर उठाना नहीं पड़ता, नजरों से आपको वजन नजर आता है! आग है तेज और कोई जलता नहीं है, गर्मजोशी में एक रिश्ता नज़र आता है! पहुंचेंगे आप जब तो वहीं मिलेंगे, साथ हैं पर यूंही नज़र नहीं आता है!  अपनों के दिए हैं जो ज़हर पिए है जो आपको कुछ कड़वा नज़र आता है! माथे पर शिकन हैं कई ओ दिल में चुभन, नज़ाकत का असर कुछ ऐसे हुआ जाता है!

मेरे गुनाह!

सांसे गुनाह हैं  सपने गुनाह हैं,। इस दौर में सारे अपने गुनाह हैं।। मणिपुर गुनाह है, गाजा गुनाह है, जमीर हो थोड़ा तो जीना गुनाह है! अज़मत गुनाह है, अकीदत गुनाह है, मेरे नहीं, तो आप हर शक्ल गुनाह हैं! ज़हन वहां है,(गाज़ा) कदम जा नहीं रहे, यारब मेरी ये अदनी मजबूरियां गुनाह हैं! कबूल है हमको कि हम गुनहगार हैं, आराम से घर बैठे ये कहना गुनाह है!  दिमाग चला रहा है दिल का कारखाना, बोले तो गुनहगार ओ खामोशी गुनाह है, जब भी जहां भी मासूम मरते हैं, उन सब दौर में ख़ुदा होना गुनाह है!