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शुरुवात अधूरेपन की


आज एक और शुरुवात, अब और भी कुछ अधूरा होगा
आपका साथ है तो कौन जाने किस करवट सबेरा होगा

बात दिल कि क्यों किसी तक पहुँचाएं,
जो मेरा है वो सच जरूर तेरा भी होगा!

कहते हैं सदियों से कि दिया तले अंधेरा होगा,
लाजिम है देखने वाली नज़रों को फ़ेरा होगा?

मैं बस अपनी समझ का ठेका लूँगा
इसमें क्या किसी से राय-मशवरा होगा?

अपने कई अंदाज़ों से मैं भी अजनबी हूँ,
दो मुलाकात में न सोचें एक सच पूरा होगा!

अक्सर वो मुझे मेरी कमियाँ गिंनाते हैं,
अधुरा करते हैं ये सोच के कि पूरा होगा!

यूँ नहीं कि अपनी खामियों को अज्ञात हैं
पर सफ़र में वो सामान नहीं मेरा होगा!

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