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दाखिले!

निकले हैं सफर को झोली भर के चल मुमकिन है सेहरा में कोई प्यास मिले ! मुतमईन है सब अपनी जोड़ तोड़ में अपने ही हाथों सब को वनवास मिले अपने साथ के लिये तन्हाई नहीं लगती खो जाये भीड़ में वो एहसास मिले जिंदगी भर साथ, सिर्फ जिंदगी देती है उतना ही दीजिए जितना रास मिले दुआओं की क्या जरुरत जो आपका साथ मिले  उम्मीद चाँद की और पूरी कायनात मिले  दिलोदिमाग मिले तो इस अंदाज़ से मिले एक कतरा अश्क का एक संजीदा बयां मिले जिधर से गुजरे एक कारवां बना चले   आज ये रास्ता उदास मिले