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देखा-देखी!

ख़्वाब में ख़्वाब को सच होते देखा, दूर थे फिर भी बहुत नज़दीक देखा! जब भी देखा उनको बड़ा मसरूफ़ देखा, कभी खुद को देखें, कभी मेरी तरफ देखा, जब भी देखा यकीनन गौर से देखा, कौन जाने आशिक कि गुनहगार देखा, जब भी देखेंगे तो मुस्करा देंगे, इस उम्मीद में एक उम्र देखा, नज़दीक से गुजरे ओ बड़ी दूर थे, समझ न आये उस अंदाज़ से देखा आइनों की जुबाँ कब सीखि है, ओ हम से ही पूछे हैं ऐसा क्या देखा, उनको देखा तो हरदम हंसी देखा, खुद को देखा तो हरदम यकीं देखा! हम देखते ही थे की उसने हमको देखा, समझ न आये, ‘देखा’ कि देखते देखा! उनकी नज़र से जब खुद को देखा, फ़िक्र देखी, फक्र देखा, असर देखा

नज़र नजरिया नज़रअंदाज़!!

अंदाज़ इ नज़र से क्या अंदाज़ लगाएं, दिल की सुनें या अपना दिमाग लगाएं! मोहब्बत हरदम एकतरफ़ा ही होती है एक दूसरे से हो ये महज़ इत्तफ़ाक़ है! क्यों अफ़सोस है की आप नज़रअंदाज़ हैं, मोहब्बत ज़ेब में रख घूमने की चीज़ नहीं! इश्क़ है तो इंकार नज़रअंदाज़ क्यों, प्यार एहसास है दिल धड़काता है, सामान नहीं जो ख़रीदा जाता है??? अंदाज़ लगाएं उनकी नज़र से या नज़रअंदाज़ करें, समझ नहीं आता कहाँ से अफ़साना ए आगाज़ करें! बहुत सी अदाएं उनकी ओ एक अंदाज़ ए नज़र, तमाम तूफ़ान पाल रहे हैं और उस पर ये कहर! सच है कि उसने हमें नज़र अंदाज़ किया हमने भी इस सच को नज़रअंदाज़ किया! यूँ अब उनकी नज़रों के अंदाज़ हो गए, नज़र आये नहीं की नज़र-अंदाज़ हो गए? जब से उनका अंदाज़-ए-नज़र देखा, अपने आप को नज़र अंदाज़ कर दिया! अंदाज ए नज़र को नज़रअंदाज़ कीजे, दिल की बात है दिल से समझ लीजे! अंदाज़ नज़र का नज़र अंदाज़ कर दिया, हमने आगाज़ किया उसने अंजाम दे दिया!

इश्क़ बगावत!

प्यार करना मेरी आदत है मतलब ये नहीं कि सबको दावत है! कोई गुनाह नहीं कि सबूत हो, ऐसी उम्मीदों को लानत है! ये जरूर नही कि दोनो को हो,  बेवज़ह न कोई क़यामत हो! नज़रों से कुछ बयाँ न करें,  इस ज़ुबाँ में मेरी ज़हालत है! जो मेरे जहन को जहमत दे उस शय को ये शहादत है! जो मेरी रुह को लानत दे ये बात उसी के बावत है किसी मंजूरी का नहीं मोहताज़ मेरा इश्क भी इक बगावत है!! दिल तोड़ के इतना खुश न बनो कुछ टुकड़े अब भी सलामत हैं !