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बूझो तो जानें!

रोक - टोक के बच्चन को, पप्पा, कैसे दिये बड़ाये, अपने मन की बात न चीनें, अब आपही कछू बुझाएं!! आपही कछू बुझाएं कि,  सब चुप्पी के मालिक, दुनिया जाये भाड़, तो का कर लेंगे गालिब, का कर लेंगे गालिब कि, बेच कलम सब खायें, खबरों की दुनिया में, सब सौदागर आये, आये सब सौदागर, सबका दाम लगायें, ख्वाब, इरादे, सपने अब पैकेट में आयें,  लाओ पैकेट में, तुम भी,  कोई बात निराली, शर्मा के का कीजे अब बिकती है लाली,  दिखती है लाली वो भी आँख में खून जमाये, मज़हव के रहनुमा रहम अब खुदा बचाये, खुदा बचाये किस किसको पैरवी सबकी तगड़ी, पैरों में पुजारी के, गरीब की पगड़ी,  कैसी पगड़ी गरीब को, शरम न आये, गिरवी रख के पगड़ी क्यों न भूख मिटाये? कौन मिटाये भुख, भूख किसकी मर जाये, ड़ाईटिंग पे है कोई कि फ़िगर ज़ीरो बन जाये,  ज़ीरो फ़िगर बन जाये ये शौक निराले, ऐ.सी. में मेहनत करके मर्द छे पैक बनाले, छह पैक के मर्द, हो गया बेड़ागरक, मरद और इंसान कि अब पहचान फ़रक!  अपनी ही पहचान से कहाँ है बच्चन वाकिफ़, यकीं के यतीम सब पप्पा मन माफ़िक पप्पा मन माफ़िक कहने को, किसका हुकुम बज...

सोच की गड़बड़ या फ़क्त बड़बड़!

होर्न का तेवर मिनस्टर का फ़ेवर , ड़ॉवरी का वर , जिंदगी आपकी क्यों दूसरे ड्राईवर ' मर्द ' नाम है जात है नर , सत्यानाश दुनिया , जा मर ! कम उम्र में निकलते बच्चों के पर , जल्दी सीख गये गुटर - गूँ कबूतर , हाथ में मोबाईल पर कंधे पे सर ? क्या अपनी चाल पे है शीला आंटी का असर ? कहते हैं अपनी मर्ज़ी है , पर खबर नहीं कौन दर्ज़ी है , ज़ेब खर्च है और महंगाई अर्ज़ी है , किसको दोष दें सच्चाई फ़र्ज़ी है , घुटने में सर ड़ाल के पड़ो , ज़िंदगी जंग है , अपनों से लड़ो ? अभी बच्चे हो जरा बड़ो , रिश्ते खून होते हैं , दोस्त जुनून , सोचो मुसीबत में कौन सुकून , हमारे हाथ में नहीं कुछ , जो मरज़ी हुकूम ! दोस्ती छुप - छुप के करेंगे , जो हाथ आया उस पे मरेंगे , दोस्ती सौगात होती है , पर रिश्ता बने तो उसकी जात होती है , इज़्ज़त सिर्फ़ ताकत की लात होती है , वरिष्ठ , बुज़ूर्ग , बड़े सब चिकने घड़े , मान्यताओं मे अटके , परंपराओं में गड़े , छोटों की सच्चाई बेमानी है , हमने भी प्यार किया था . . . तेरी - मेरी माँ की . . ....

फ़िक्स ड़िपोज़िट!

जहाँ दिखे कोई छोटा , बड़े बनते हैं , करने को और छोटा मुर्दे गड़े चुनते हैं , जिंदगी बच्चों का कोई खेल नहीं है , हमने देखा है , तजुर्बे का कोई मेल नहीं है , आदर से सर झुकाओ , बेफ़ज़ूल सवालों पर ताला लगाओ , जमीं पर तुम्हारे पैर नहीं हैं , आसमां तुम्हारी ओर नहीं है , . . .खामोश ! मेरा सच कुछ और है , पर मेरे इरादे मासूम है , और मेरी आवाज़ में कहाँ वो जोर है , ज्यादातर बचपन इन बातों में दल जाते हैं , कुछ फ़िर भी इन तंगसोची से परे आते हैं , और फ़िर ये शिकायत कि दुनिया ठीक नही चल रही बच्चे बुज़ुर्गों का मान नही करते , भूल गये बच्चे अब बड़े है , आपकी तमाम कोशिशों के बावजूद , और बड़े मान नहीं करते , अपने हर फ़र्ज़ का दाम करते हैं , नहीं यकीन तो खुद को सुन लो , " कितना त्याग किया तुम्हें बड़ा करने में " " बुखार तो रात रात  ठंड़ी पट्टी लगाई थी " " और कंधे पर धरकर झांकी दिखाई थी " “ और मां ने नौ महीने पेट में रखा था " जैसे बच्चे नहीं कोई बैंक का खाता हैं , अभी जमा किया बाद में सूद आता है! क्या आपका अ...