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बदलती पहचानें!

घर बैठे बदल रहे हैं, नये खेल चल रहे हैं, डर अब समझदारी ये चाल चल रहे हैं!  ताकत की दुकान है,  बड़ी लंबी लाईन है!  डर खरीद कर सब अब निकल रहे हैं!! बेबस सुबह है रोशनी के बावज़ूद,  आईने सब पूछते हैं क्या वजूद? प्यार ही बचाएगा, प्यार ही जगाएगा,  दूर हो या पास, प्यार से हो जाएगा! गलत करने को अब गम काफ़ी हैं, बहक जाएं कदम अब तो माफ़ी है? सवाल हैं हर तरफ़ आप पूछना चाहें तो, सवाल ये है कि आपकी नज़र में क्यों नहीं? जो सामने हैं वो सवाल है, हाल नहीं, आप पूछेंगे या माकूल हालात नहीं? अपनों कि परिभाषा इतनी तंग क्यों है? दुसरे को गैर बना दें, ऐसे ढंग क्यों हैं? सोच उड़्ती है या सिकुडती है? जोडती है या बिखराती है? बवज़ह नहीं हैं आसमान, आपकी नज़र कहां जाती है? नफ़रत गर जवाब है तो सवाल क्या था? तंग कर दे नज़रिया वो ख्याल क्या था? वादे ईरादे हैं क्या? या सिर्फ़ बातें हैं? नीयत साफ़ नहीं, एक यही सच बचा है! आईने अलग, तस्वीर अलग, मैं एक कहाँ?  जैसे-तैसे, जहां-तहां, यहां-वहां, कहाँ- ...

मौत की दुकानदारी

मौत ले लो मौत, जो ख़रीदे उसका भी भला, जो बेचे उसका भी भला, जो मरे उसको दफ़ना-जला! मौत सरकारी भी है और आतंकी भी, व्यापम भी है और उरी भी, भारत भी है और कश्मीरी भी, फांसी का फंदा है, किसी को धंद्या है! मौत एक बेनामी गाय है, ताकत के हाथों एक राय है! किसी के लिए खर्चा है, किसी के चाय की चर्चा है! किसी की मौत गुस्सा किसी की मौत जूनून किसी की मौत आतंक किसी की जूनून, कोई खुनी, कोई आतंकी कोई देशभक्त, किसी का मारना बहादुरी, किसी का कायरी, किसी को वीरगति, किसी को कुत्ते की किसी की मौत मज़हब किसी की जात किसी का बदला, किसी पर हमला...... ....... फिर भी हम इंसान हैं, जानवरो से अलग, कहने को बेहतर, लगे हर लम्हा इस धरती को करने में बदतर! तरक्की तहज़ीब मुबारक हो!

गाय - बायोडेटा

नाम - गाय पेशा - दूध धर्म - हिंदू जात - ऊँची, बड़ी, दबंग पद - सरकार परिवार - संघ   भाई - बजरंग बाप - बीजेपी माँ - वी एच पी दोस्त - राम सेना पता (घर का) - कचरे का ढेर, कोई भी सड़क, पता (ऑफ़िस) - नोर्थ ब्लॉक, केन्द्रिय सचिवालय दिल्ली नियमित पता (परमानेंट) - हेड़गेवार भवन, महल मार्ग, नागपुर भाषा - समझने वाली - ड़ंडा, घुँसा, लात, लाठी,प्यार का हाथ, गाली   भाषा - बोलने वाली - मेंएंएंएंएंएं   खाना - नॉन वेज फ़ेवरेट डिश - दलित, मुस्लिम की पीठ, इज़्ज़त, लाश