सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

दायरे लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दुनियादारी!

रंग हर एक को, एक जैसे नज़र नहीं आते,  खाली पेट फ़ीके रंग, भरी ज़ेब चटक जाते! खुद से आप किस ज़ुबान में बोलते हैं,  थपथपाते हैं पीठ या हमेशा तौलते हैं? सुनते हैं, क्या, चुनते हैं, अनसुना करते है!  युँ भी हम सोच का तानाबाना बुनते हैं!! दुनियादारी ज़ंजीर है गुलामी की,  समझदारी वो जो आज़ाद रखे,  एक ही तरीके सब के बात मशीनी है,  बात वो जो आपको बेबाक रखे! खुद को कम करने के हज़ार नुस्खे हैं, बाज़ार भरे हुए हैं बदलते रंगों से! कुछ चाह कर बदलते हैं, कुछ आह कर, कराह कर कुछ न बदले बदलते हैं, की दुनिया उनकी बदल गई!   शाबाशी दे कर गिरफ़्त में लेती है, ईनाम में जो मज़ा है, एक तरह की सज़ा है, लगाम पर आपकी हाथ किसका है? आप की दुनिया क्या, किस दुनिया के आप, आपके हैं दायरे या, किन्हीं दायरों में आप!

रोज़ होते कम!

कितने टूटे हैं हम, कितनी दरारें हैं, रिस रहे हैं  हज़ार जगहों से, लाख वजहों से, कितने कम पड़ते हैं, अपना कहकर, अपनों से लड़ते हैं, छीन लेने को,  उनका यक़ीन, उनका प्यार ज़ख्मों का कारोबार, हिंसा का सिक्का, इतना डर? कैसे इतने हम खर्च हो जाते हैं? खुद को भी बचा नहीं पाते हैं? दुनिया की बंदर बांट में, फिट होने को, बहाना! खुद को तराशते हैं।  सच कुछ और! ख़ुद को ही काटते, छांटते, नापते, हर मोड़ कुछ और कम हो जाते हैं, और फिर  ख़ुद को ही ढूंढते हैं, ज़हन में दरबदर घूमते हैं, न ख़त्म होने वाली तलाश, हमारी लाश! कितने हम बिखरे पड़े हैं, टुकड़ों में,  हर जगह, घर में, दुनिया में, अकेले में, काम पर, दोस्तों के साथ, हर जगह,  अधूरे बड़े हैं, हर लम्हा पूरा होने, खर्च होते हैं, चमक चुनते दुनिया कि, अपने अंधेरों को शर्माते हैं, अपने सामने, खुल कर कब आते हैं? नाम कमाने को अपना, ख़र्च हुए जाते हैं, बड़े सस्ते  खुद को निपटाते हैं! भीड़ में एक नाम? जय श्री!!!

आते जाते हालाते

कुछ नज़दीकियां हैं जिनको मंजुर हम नहीं यार हैं पर यार के कमज़ोर हम नहीं लगता है लम्हॊ को हम रास नहीं आते उम्र हो गयी, अब वो पास नहीं आते बहकने का अब सारा जिम्मा हमारा है उनके हाथॊ में, अब वो जाम नहीं आते नब्ज़ देख, अब भी हाल जान लेते हैं क्या करें हम ? जो उनके हाथ नहीं आते यकीं को कुछ कम हो गये वादे हमारे दायरऒ के बाहर अब, इरादे नहीं आते महफ़िल में अब भी शुन्य का जिक्र आता है कैसे कहें अब गिनतियॊ में हम नहीं आते।