सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

black money लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या बदला इंसान?

देख तेरे व्यापार की हालात क्या हो गयी भगवान ,  कितना बदल गया इंसान ,  कैसे युस करे तेरा नाम , हवा बदल गयी , बरफ़ पिघल गयी , जंगल हुए शमशान कितना बदल गया इंसान ,  थुके कंहा कंहा ये पान , रिश्तों की ये उल्टी गंगा , फ़ेसबूक पर पप्पा मम्मा दोस्त बनाने का ये धंधा , आई मुसीबत दिखता है ठेंगा सच्चाई से दूर हो रहे राहुल , गीता , श्याम कितना बदल गया इंसान कैसे समाचार के धंधे , breaking news पर टिके हैं बंदे बने सब हम सोने के अंड़े , घर में घुस गये दिल के अंधे मरे हुए के बाप से पुँछें , आप का क्या है बयान कितना बदल गया इंसान education जादू मंतर माँ - बाप - बच्चे बने हें बंदर चाहे कितने अच्छे हो नम्बर मोटी रकम हो पहले अंदर खोल खोल शिक्षा के मंदिर चूस रहे सब प्राण कितना बदल गया इंसान बैठा तू मंदिर में भोले तेरे नाम के धंधे खोले black money के भर भर झोले पाप सबके जो तराजू तोले स्वामी , श्री , पंडित के बनते बंगले आलीशान कितना बदल गया इंसान करे पाप भी तेरे नाम , जुँ नहीं रेंगे इनके कान मोटी चमड़ी , खोटे...

कशिश - ए- खुदकशी!

मौत कितनी आसान है, जी करता है खुदकशी कर लूँ! जिन्दगी विस्तार है  दो हाथों में नहीं समाती , मौत आसान है, बाँहों में भर लूँ जिन्दगी कितनी लाचार, कितनी मोहताज़ है मौत का हर तरफ राज़ है  मौत जिन्दगी का ताज है  जिन्दगी मोह है, मौत सन्यास जिन्दगी अंत है, मौत अनंत  मौत पर न कोई राशन है, न प्रतिबन्ध  जिन्दगी है, न ख़त्म होने वाली लाइन का द्वन्द जिन्दगी अमीर है, गरीब है बेमुश्किल खरीद है मौत आसानी से हासिल  जिन्दगी के बदले की चीज़ है  जिन्दगी, कमज़ोर दिल वालों के बस की बात नहीं  मौत का कोई मज़हब, कोई जात नहीं जिन्दगी जड़ है, झगड़ा, फसाद है  सबको एक जैसी मौत को दाद है  आखिर कहाँ पहुंचा हमारा उत्थान है  कि मौत आसान है, फिर भी, जिन्दगी के पीछे दौड़ता इंसान है जो जुल्मी है, पापी है, शैतान है  उसी का सम्मान है! सरल, सहज, समान, हर एक को एक ही दाम मौत आसान है, इमान है  बिन मांगे मिल जाये वो सामान है सच कहते है, घर कि मुर्गी दाल बराबर ! पर क्या करें, जिन्दगी लालच है...