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महिला दिवस - पुण्यतिथि या जयंति?

क्या आज सच में महिला दिन है? या बस एक पोस्टर कल जिसको बिन है? महिला दिवस है,  जन्म दिवस या पुण्यतिथि? बोलिए क्या है स्तिथि? ज़मीनी हालात?  ख़बर क्या है, नज़र क्या? एक दिन का असर क्या? 364 का सबर क्या?  और एक दिन ढल गया, एक दिन की बात थी, कल से, काल से  अब क्या सवाल करें?  नाउम्मीदी के तमाम ज़ख्म भरते नहीं, हालात आज भी सुधरते नहीं, औरत आज भी चीज़ है, नाचीज़, दरख़्त बने हुए मर्दानगी के बीज़! आज महिला दिन है, किस पर आपने फबती नहीं कसी? किस पर नज़र आज नहीं फेरी? किस धारणा को आज तज़ दिया? क्या सामने है जिसको सच किया? और अब कल? और परसों, फिर नरसों... तुम भी क्या याद रखोगी, आज महिला दिन है, और कुछ नहीं तो एक चिन्ह है? डूबते को तिनके का सहारा, सच को पर्दा,  आज औरत होने को डिस्काउंट है! कल से वही दुनिया कोई डाउट है?  इस दुनिया को बेहतर बनाएं चलो सब नामर्द बन जाएं!!

स्त्रीधन

बचपन से हमको सिखाया है,  लड़की हमारी संपत्ति है, और पराया धन, हमारी इज्जत, दुनिया बड़ी बुरी है, मर्दों कि नज़र छुरी है,  चारदिवारी बड़ी है, यही आपकी जिंदगी कि धुरी है, अब ये आपकी किस्मत है अगर आपके भाई-भतिजों या चाचा-ताऊ कि नीयत बुरी है! तसल्ली रखिये, घर की बात घर है, बड़ों की इज्जत-छोटों को प्यार यही है हमारे संस्कार, जो हमें सिखाते हैं, बेटियों का तिरस्कार, पतियों का व्यभिचार माँ लाचार, अनकंड़ीशनल प्यार, कोई बात नहीं बेटा, दिल ही तो है, फ़िर मत करना बलात्कार, हम तुम्हारे लिये ले आयेंगे, अनछुई, छुई-मुई, गोरी-चिट्टी, एक अबला, बॉटल में अचार, खोलो, चखो, खाने में नरम, बिस्तर गरम, घर हमारा मंदिर है दिन में और रात को हरम, परिपक्व है हमारा समाज़, पुरुष-प्रधान है, स्त्री हमारा खर्चा है, (कन्या) दान हैं, जी भर के करते हैं, मर्द कितने महान हैं!

दूध का दूध, पानी का पानी

सब कहते हैं शमां जला देती ही परवानों को, कौन कहे कि शमां को जलाया किसने है ? मर्द को औरत पर कितना प्यार आया है दिल नहीं टूटे किसी का हरम बनाया है! वो सहें दर्द तो उनकी नियति है आप करते अहसान, कि जिनकी गिनती है? कहने को तो इश्क में हर चीज़ जायज़ है फिर क्यों कर किसी कि हस्ती नाजायज़ है ? गले में मंगल माथे पर सिन्दूर कहीं सुना था प्यार को बंधन नहीं मंजूर! हर शहर में चमड़े का धंधा होता है सच कहा किसी ने प्यार अंधा होता है? 'अवसर' आने पर उनको पूज लेते हैं असर मर्दानिगी में इज्जत भी लुट लेते हैं? कभी कहते बला है कभी अबला बन गयी कमजोरी तो दल बदला दूध का दूध, पानी का पानी मिलावट नहीं है, अर्थात जनानी आँचल में दूध है, आँखों में पानी (मानवता के बेहतर अर्धांश को समर्पित)

आज महिला दिन है

आज महिला दिन है और मालिक(पूंजीवादी) गिनतियाँ गिना रहे हैं, कहीं कहीं तो मुफ्त मे उनको दारू भी पिला रहे हैं, आप आ पहुंचे हो, दूनिया तैयार है, थोड़े पैसे खर्च कीजिये आज आपका त्यौहार है,   आज आप आसमान पर हैं, चाँद पर आपके पाँव हैं, (कवियों के हिसाब से आप अपने चहरे पर चल रहे हैं) इटली में आपके गांव हैं, विश्व और ब्रम्हाडं सुंदरियां साल दर साल बढती जा रही हैं, बहुत से देशों मे तो उनकी हर साल फसल आ रही हैं और आज तो संसद में भी, महिला बिल पास होने वाला है(मार्च २०१०) (आखिर देश की वाट लगाने की जिम्मेदारी सिर्फ मर्द क्यों लें) और आज ही पहली महिला निर्देशक ने एक ऑस्कर जीता है  और मुझे यकीं हैं किसी छोटी बच्ची, ने कहीं एक झोपडी में आज a,b,c,d सीखा है महारानी अब भी एलिजाबेथ हैं, पर ‘fair and lovely’ फिर भी सफ़ेद है शुक्र है मैंने गणित किया है कभी जिया नहीं, मैं उलटी गिनता हूँ और शुरू शुन्य से आज औरत दिन है? मैं देखता हूँ तो अनगिनत जगह अब भी सिर्फ (dust) बिन है पिछले १५ दिनों में मैंने एक १४ साल की माँ देखी है, और सुनते है कल किसी ने नौ साल की, लड़की ...