सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

वायरस लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कोरोनोलॉजी!

पहले क्या और बाद में क्या ये सच जान, इसको कहते क्रोनोलॉजी तड़ीपार ये ज्ञान! हस्पताल बुरे हाल में, नर्स डॉक्टर परेशान, आँख पे पर्दा डालने देते ताली/थाली ज्ञान! माथे पड़ती शिकन तो करोनॉलॉजी जान, डॉक्टर को थेँकु पहले और उस पे विज्ञान! पड़े लिखे बहक जाएं सुन के बात विज्ञानी, बिना सवाल मत मानो मूरख कब जानी? करत करत थाली को चोट, बापर होत निसान, अकल बड़ी के भैंस जा दे कोउ तुमको ज्ञान!! का दे कोउ गान, जो तुम कानन के कच्चे? लगे बघारन ज्ञान पड़ व्हाट्स के चिट्ठे!! व्हाट्सएप के गियान से अच्छे अच्छे घबराएं! न्यूटन, आइंस्टीन सुना कबर में लोट लगाएं!! कबर खुदी है ज्ञान की, अर्थी पर विज्ञान, सब शास्त्रन में लिखा है जो बोले सो मान! 

कोरोना ऐसा!

खाए सो थाली छेद करें, पीट पीट के तोय, ऐसी नाशुकरा हरकत से कोनहु भला न होए! कोका भला सोच कंधे से कंधा मिल आए, नेक इरादा आपका कोरोना कौन बताए? इतनी भी हद करो न, अक्ल घुटने में धरो न! शोर से भागती बीमारी?? जाके घांस चरो न!! भेड़ जो ढूंढन वो चला भेड़ न मिलया कोई, करनी सबकी बोल रही, हमउँ तो भेड़ होई!  भेड़चाल ऐसी के जा गरबा कर आए, पहले ताली पीटे अब खुद की पीठ थपाएँ! मिल कर सब मूरख भए, ताली जोर बजाए, डागदर सबहुँ सोच रहे, ये बीमारी कौन उपाय? थाली पीटत जग मुआ, कोरोना हुआ न कोई, तीन आखर वायरस का छुआ सो बाको होई!! कहे कबीर, माथा पीटत, अब हमसे न होई, ताली बजा के छींक दिया, अब हमरा का होई?