खूबसूरत एक सुबह देखी, मस्त अपनी पहचान लिए, बिना कोई हलकान लिए, बिखरी हुई जगह जगह, न कोई मंजिल, न कोई वजह, घाँस के तिनकों पर, फूलों के मनकों पर झुरमुट पर, मिट्टी को लाल किए, पत्तों के गाल लिए, चलती भी साथ में, रुकी हुई बरसात में झरनों की गुनगुन में मकडी की बन बुन में, पूरी मेरे साथ आ गई, किसी को छोड़ कर नहीं, कोई दिल तोड़ कर नहीं, काश हम भी यूँ हो पाए, अपने भी और उनके भी, बिन टूटे टुकड़ों में, पूरे जितने भी हैं, सफ़र है, मोड़ आएंगे, मुड़ जाएंगे!
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।