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तीन कदम

गुम हो, गुमसुम हो, रास्ते नहीं मिलते कदम हिचक रहे हैं इरादे खामोश हैं ये कौन मंजिल है? ये क्या हासिल हैं? क्यों मझधार साहिल है, कहां जाएं? पहला कदम! मान जाएं, हवा, पानी,  फूल पत्ते, हरियाली, नील गगन सूरज के आते-जाते अदभुत रंग, आपके लिए है, दुनिया इस ढंग दूसरा कदम, जान जाइए, आप मिट्टी से जुड़े हैं ठीक उसी तरह,  जैसे हर जीवन, सब की यहीं जड़ें हैं, हर एक अधूरा है, मिलकर सब पूरा है, कोई कम नहीं, किसी से, किसी वजह से, किसी भी, तो अब जब चल दिए हैं, पहला कदम, दूसरा भी तीसरा कदम, पहचान जाइए, रास्ते चलने से बनते हैं, चलते चलते रास्ते बनते हैं। चलिए आप अपने सफर, फिर कहीं मिलते हैं!

मोहब्बत!

मोहब्बत क्यों ये मुश्किल काम है? पहलू में उनके सुकूँ, आराम है! क्यों दुनिया में आशिकी बदनाम है? उनकी शिकायत, ये जरूरी काम है! फिक्र है मेरी ये उनका काम है, ये समझ लेना सफर का नाम है! सब शिकायत है मेरी ख़ामोशी से चुप हैं हम और खासे बदनाम हैं! नज़र जब भी नज़रिया बन जाए, समझ लीजे किसी का काम तमाम है! ज़िंदगी जी रही है ख़ूब दोनों को, हम हैं साकी और वो जाम है! मोहब्बत गहरी पहचान है, सुबह मेरी ओ उनकी शाम है!

पारस्परिकता!

ये भी एक सफ़र है, ज़िंदगी असर है, आपकी नज़र में नहीं, इन रास्तों की, कहाँ आपको ख़बर है? आप समय से चलते हैं, लम्हे, पल,  दिन महीने साल, कामयाबी मलाल! हम चलते हैं, वक़्त बदलने को, हम नापते नहीं, भांपते हैं! गलतफहमी है, मौसम हमें नहीं बदलते, हम साथ चलते हैं, एक - दूजे से ढलते हैं, मिट्टी भी हम, बादल भी, हम ही पहाड़ भी, नदी, नाला, तालाब भी, कोई छोटा-बड़ा नहीं! ये आपका नज़रिया है, नज़र नहीं, सच आपको! आप दौर में अटके हैं, नई चीजों से भटके हैं, कपड़े भी बदल लिए तो सोचें आप हटके हैं! निरी मूरखता, कोई भी हट के नहीं,  आप भी जानते हैं, सच में आप गोबर हैं! बुरा लग गया? यही आपकी समस्या है, दिखे सुने में फंसे हैं, एक दूजे पे हंसे हैं, नफ़रत, मोहब्बत, अच्छे-बुरे, ज्यादा-कम, सही-गलत? तराजू के बंदर हैं आप! एक पल स्थिर नहीं! ऊंच-नीच के खेल खेलिए! हम देख रहे हैं,  अपनी जगह, काट दीजिए, छाँट दीजिए, हम फिर भी वही हैं, न गलत हैं न सही, आपसी, एक और अनेक, एक साथ, पारस्परिक, और आत्मनिर्भर भी? समझ जाएंगे जिस दिन, उस दिन आ...