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गूंजती खामोशियाँ!

सब खामोश हैं कोई सुन नहीं सकता? दर्द सारे मज़हबी रंगों में बिकने लगे हैं! बेख़बर अपने खंजरों से, इतने मासूम हैं सारे दोष शिकार के, ऐसे गुनहगार हैं!  किस किस क़त्ल पर भगवान का नाम है, बस एक मत्था टेका के सौ खून माफ हैं! इतनी चुप्पी है या कान के पर्दे फट गए? इतने घिनौने सच, सब धर्म जात में बंट गए! नफ़रत माफ, झूठ माफ, सरेआम कत्ल माफ़? अपने धर्म की शिक्षा सबको कितनी साफ है! घर बैठे हर एक गुनाह की वकालत करते हैं, आंखों पर पट्टी बांध सब इबादत करते हैं! अपनी कमियों ने कितना कमजोर किया है,  इलाज़ ये कि किस किस को दोष दिया है? यूँ नहीं की शहर के सारे आईने ख़ामोश हैं!  किसके हाथों बिक रहे हैं, ये किसको होश है? ज़ुल्मतों की कमी नहीं, और रोशनी कातिल है, किसको इल्ज़ाम दे के अपने ही सब शामिल हैं! (ज़ुल्मतें - अँधेरे)

टूटती सच्चाईयाँ!

पैर ही छा ले बन गए हैं हवा के निवाले बन गए हैं, जुड़े हाथ प्या ले बने हैं अपने मुल्क के निकाले बने हैं! इस मुल्क में  सब कुछ चलता है! जैसे मजदूर हजार  मील ! घर बैठे  टीवी  पर देखने मिलता है! देश को  बेरहमी  से शमशान कर दिया! भुख और मौत  को मुसलमान  कर दिया! नफ़रत  या द्वेष  कहते हैं,  किसने  कहा देश  कहते हैं! नफ़रत है, द्वेष है,  भेड़िए भेड़ों के भेष  हैं, बाकी सब ठीक,  बड़ा  प्यारा अपना दे श है! कोई सर परस्त नहीं,  मुल्क को यतीम हम, दिलासे खो खले निक ले,  सारे यक़ीन कम! दूरियां बनाए रखना पुरानी परंपरा है, बीमार संस्कृति बड़ी काम आ रही है! बीमारी से मुक्ति मिली,  गरीबी से निज़ात,  जात, धर्म पूछें तो  और बिगड़ जाएगी बात!

फार्मूला-ए-देशप्रेम!

देश भक्त होना कितना आसान है, घर बैठे बैठे करने का ये काम है, सरकार ने नए फॉर्मूले बनाए हैं, माँ कसम, इतने सरल उपाय हैं! फॉर्मूला नम्बर 1 "ख़ामोशी सोना है" बोल कर क्या होना है? चुप रहिए, "शांत रहो", अपने ज़मीर को कहिए, सरकार, जनता की, जनता के लिए, गलत कुछ कर नहीं सकती, आपको यूँही शक है, और शक का कोई इलाज नहीं, इस फॉर्मूले को प्रधानमंत्री का सपोर्ट है, अगर आप नहीं करते तो आपके मन में खोट है, आप देश द्रोही हैं, और आपको डंडा मिलेगा, सख्ती से आपको सच मिलेगा! फार्मूला नंबर 2 लाईन में खड़े हो, जितनी लंबी लाईन, जितनी देर, आप खड़े खड़े समय बिताएंगे, आप अपने आप देशभक्त गिने जाएंगे, पैसा तो वैसे भी हाथों का मैल है, आज नहीं तो कल, ...कल....कल हाथ आ जायेगा! अब ख़ाली ज़ेब वाला भी, देशभक्त कहलायेगा! (चेतावनी "मेरा नम्बर कब आएगा" ये पूछना पाप है, ) लाइन में खड़े रहने, आपके लिए एक जाप है, इसमें राम बाबा की छाप है, पतन को अंजलि दीजिए, कहिए, 'अच्छे दिन आएंगे' ....साँस अंदर .....साँस बाहर फार्मूला नम्बर 3 लकी रंग अपनाएं, भगवा या ...

लापता रंग!

कहते हैं आज़ाद है, सुनाई देता है, फ़िर क्यों  लगता है ये झुठी आवाज़ है, प्रश्न सर उठाते है, ' आज़ाद है ' कौन, किससे, कब, कहां  ? क्या नहीं दिखता ? दबा, झुका, सिमटा, रुका, अटका,भटका पस्त, लाचार, रेंगता, लड़खड़ाता आपको नज़र नहीं आता? जाहिर है, आप सावधान में खड़े हैं अपनी मान्यताओं में गड़े हैं  नज़र उपर है, क्योंकि झंड़े खड़े हैं, और पांव तले रेंगते हुए सच, नज़र नहीं आते    जाने दीजिये, आपकी मज़बुरी है, आप आज़ाद हैं ये जश्न आपको मुबारक हो!