मैं अपने दायरों में फिर भी बंधा नहीं, उड़ने के लिए मुझे एक आसमां बहुत है अपनी आँखों से दुनिया को ख़्वाब दिखाते हैं, आप पानी डालते रहिये हम आग बनाते हैं ये माना गहरे पानी में नहीं आपकी नांव के सवार बैठकर साहिल पर हमने भी किये कुछ शिकार वो और होंगे जो कतार बनाते हैं हम वो नहीं जो गिनतियों में आते हैं, समझदार को सिर्फ एक इशारा है, डूबते को तिनके का सहारा है हो जौहरी को हीरे की पहचान तराशने वाले के हाथों में उसकी जान आपको लगते हैं अगर अब भी अनजान चलिए समझिए यही है हमारी पहचान बंजारों के लिए सफर भी एक मक़ाम होए है, शुक्रगुजार हो दिल जो एक पल भी कोई साथ होये है (१९९७ में नौकरी की तलाश में तैयार अपने पहचान पत्र/Resume से उद्वत)
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।