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मैं भारत!

 मैं भारत हूं... टुकड़े टुकड़े, टूटता, बिखरता, बिलखता, आज-कल  अपनी पहचान खो, खोजता हूं, नफ़रत और दरिंदगी में, हिंदुत्व की गंदगी में, अयोध्या में घायल हूं, हरिद्वार में कातिल, किसानों की लाश हूं, भीमा-कोरेगांव का झूठ हूं, आर. एस. एस. की साजिश हूं, भीड़ का पागलपन भी में ही, मैं ही पड़ा लिखा वहशी हूं, मैं ही धर्म का तैशी हूं! सभ्यता की ऐसी तैसी हूं! दिल के, दिमाग के, सोच के, हमदिली के टुकड़े टुकड़े कर के सब एक हैं, कोई पहचान नहीं किसी की सब शामिल हैं, कोई जान कर,  कोई चुप मानकर, कोई मजबूर जानकर, गुस्से में, नफ़रत से, गले पर तलवार की धार, सर पर राम सवार, कराते जयजयकार, भगवान को प्यारे होते, कोई जी के, कोई मारे हुए, अपने अपने टुकड़ों में, सब एक ही भारत हैं, पर क्या एक हैं ?

देसधरम ज़ीरो करम!

देश क्या है, धरम क्या है? और आपका करम क्या है? भरम एकता का, शोर अनेकता का? जो अलग है, वो ग़लत क्यों है? देश क्या है? सरकार? निकम्मी, बेकार? दुष्प्रचार? छाँटती, बाँटती, तोड़ती मोड़ती, सच को, झूठ को प्रधान है, नफ़रत को सम्मान है? यही गीता का ज्ञान है! कर्म करो, धर्म की चिंता मत करो!! तो सच कैसे पहचानें? क्या मानें, क्या जानें? वाइरल हुआ वो सच? जो उकसाता है? बहकाता है? घर से बाहर आ पहलू, जुनैद, रिज़वान की मौत बन जाता है? कानून आपके साथ भी, और आपके हाथ भी! नफ़रत नशा है और  आपकी आदत! वक्त ने करवट पलटी है, चाल बदली है, आपका क्या हाल है, क्या नया ख़्याल है? तरक्की, विकास, सभ्यता, जिसपर हमको नाज़ है, क्यों वो घुटने मुड़ी है? मुँह बाए खड़ी है! बात बहुत बड़ी है? आपको क्या पड़ी है? चीख़ने वाले हर जगह, सड़क पर, घर में, टीवी पर सच का जोर नहीं शोर का सच है तोल मोल कर बोलने वाले गुनहगार हैं, तानाशाह को मन की बात भूत सवार है! और आपको क्या गवार है? 

सच आसपास!

हालात, बिगड़े हुए, और  बिगड़ेंगे, टूटे हैं जो, और बिखरेंगे, कमज़ोर चूस कर ताकत बढ़ाते हैं, आपने किस को वोट दिया? था? संस्कृति पुरानी है, गौरवशाली, कड़वे सच रौंद कर, मन की बात, इतिहास, बन रही है, अंधभक्तों की  नई जमात, गर्व से कहो... "जिसकी लाठी उनकी भैंस" बुरा लगता है देश अपना समाज अपना धर्म, जात वर्ग, अपना, अपने द्वारा, अपने लिए, बाकी सब ? पतली गली से निकलिए, गांव, झोपड़-पट्टी, कचरे पर, कचरा जोड़, बेच, पैबंद लगी दीवारों की बस्ती! मेरा भारत महान, मेरा सामान, मेरी दुकान मालिक, सरपरस्त, सेठ, नेता, प्रधान, सर्वेसर्वा कितने नाम, ऊंची दुकान  फीके पकवान, मुसीबत में सब उड़नछू हराम!  हेराम! आपका वोट आपका अंजाम! सच जानेंगे या मनकही मानेंगे? अनकही बातें,  अदृश्य, अनगिने लोगों की, अनचाहे लम्हों की, अनगिनत मुश्किलें, उबलते सवाल, क्या आपको नहीं हैं? जो होता है क्या वो सही है? आपके सवाल कहाँ हैं?

अफ़सोस, ए मुल्क!

गणमंत्र दिवस स्वाहा!

देवी है, माता है, इज़्ज़त है हर 'मर्द' की, फिर भी दवा नहीं कोई इसके दर्द की (बलात्कार जैसे देश की संस्कृति है) कोई देशभक्त गुंडा गाली देगा इसका भय है मज़बूरी में कहते जय जय जय जय है! (सिनेमाघर में डर के मारे देशभक्त बनाये जा रहे हैं) भेड़िये भेड़ बने हैं, तोड़ मस्जिद नफ़रत पालते हैं, मज़हब का सब पर जाल डालते हैं। (आर एस एस) भीड़ में सब खड़े हो गए, खासे चिकने घड़े हो गए, सोच के दड़बे हो गए, 'एक' के टुकड़े हो गए (भक्त जो विविधता का खून कर रहे हैं) बाबरी की छत टूटी, संविधान की इज्जत लूटी, अब सत्ता में हैं, देश कि तो किस्मत फूटी! (आप खुद समझदार हैं) पूरा मुल्क सावधान है, तहज़ीब को विश्राम है जिसने सर उठाया उसको काले रंग का नया ज्ञान है! (विरोध अब हिंसा है, जो हट कर बोले उसको मुँह काला कर घरवापस करते हैं) जन जन क्या मन है? क्यों इतना पिछड़ापन है?? (आपको विकास दिखता है या गांव और स्लम में उसका अवकाश) जय जय जय जय है, क्यों देशभक्ति का नाम भय है? ( क्यों हम इतने डरे हैं कि किसी के सवाल उठाने से आक्रमक हो जाते हैं) भारत माता की जय, रोज़ खबर है, अच्छाई पर ...