सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

afspa लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भागते रहो!!

चारों तरफ पहरा है, बंदोबस्त, जबरजस्त एक पूरे मुल्क की ताकत, कर रही है हिफाज़त? चौबीसों चौकन्ने, तीसों होशियार, क्या मज़ाल किसी की, ख़बरदार! सुई पटक सन्नाटा, बेहिसाब असला, कहाँ कोई मसला? इसे कहते है ताकत, लोकशाही की, चप्पा चप्पा मुस्तैद, सबका साथ, सबका हिसाब! कश्मीर! एक जेल! कश्मीरियों के लिए! वाह! भारत सरकार! वाह! जहां चाह, वहां आह! मासूमियत बेपनाह!

अखंड नीयत!

पहरा तो गहरा है, हर कोने पर शक खड़ा है, हर गली में बदनियती पहरा देती है, कितना भी नेकनियत निकलिए, खौफ़ गश्त लगा रहा है, बदसलूकी रोज़ का मौसम बनी है, हाथ उठते है, और गरेबाँ हो जाते हैं, वो कहाँ मर्द औरत में फ़र्क लाते है? आखिर अखंड भारत के नुमाइंदे है, शायद ये संविधान के कायदे हैं, बराबरी!