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हम लोग!

  रीढ़ की हड्डी पहले ही नम थी, अब ऑक्सीजन भी कम है! जो बोया वही काटते हैं, आख़िर किस बात का गम है? सच का सामना हुआ अब, तो मन की बात झूठ लगती है? अब पछतावत होत का, नफ़रत ऐसे ही फलती फूलती है! जो नज़र ही न आए, वो सच है के झूठ? भक्ति का काम है जपें "बहुत खूब, बहुत खूब"! मरने वाले सब लाश हो गए, ज़िंदा हैं जो काश हो गए, ध्यान से सुनिए खबर, सच सब सत्यानाश हो गए! अच्छों अच्छों के पाप धुले हैं,  डुबकी लो बस आप भले हैं! उनके गुनाह नहीं गिनते मूरख,  जो गाय दूध-मूत धुले हैं! कुम्भ_करन को सब जाएं,  करमकांड को करम बनायें, भक्ति मोह-माया बन गई,  एक दुजे से होड़ लगाएं!   

मरता क्या न करता?

मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, गधे नेता वोटों की घांस चर रहे हैं? मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, सांसे कम पड़ रही हैं, और हस्पताल! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, चुल्लू काफ़ी फिर भी गंगा तर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, भगवान बचाए, सो वो रास्ता कर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, फिर भी लाखों सच से मुकर रहे हैं? सरकार निकम्मी है, नाकार और दुष्ट, मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं! इलाज के लिए दर दर भटक रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, साहेब तस्वीर में फिर भी चमक रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, भूखे, मजदूर, लाचार, दो मौत मर रहे हैं! देशभक्ति में सवाल न पूछने मजबूर हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, कोविड मरीज़ दाढ़ी जैसे बड़ रहे हैं! किसकी? दवा और दुआ दोनों ही मुकर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, वोट आपके बड़ा कमाल कर रहे हैं?

आबाद तबाही!

तबाही में सब आबाद होते हैं, यूं इस मुल्क में बरबाद होते हैं। चौखट पर बैठे हैं हैवानियत के, इस दौर में जो नाबाद होते हैं? एक ही बीमारी के सब मरीज़, नफ़रत के अपनी धारदार होते हैं! मज़लूम हैं वो ही बर्बाद हैं, ओ हम पूंजीवाद के क्यों तरफ़दार होते हैं? ख़ुद से सोचना गुम होता हुनर है, हवा की रुख के अब सवार होते हैं! पेशेवर सब नए गुलाम हैं काबिल, हुक़्म कोई भी हो, सब तैयार होते हैं! क्या मजाल किसी की, अलग सोच ले, जो हैं वो सब दर रोज़ गिरफ़्तार होते हैं!

कोरोना बीमार!

बीमार करके फ़िर दवा देते हैं, आपको तारीफ़ की वज़ह देते हैं! दवा दे कर बीमार करते हैं, किराया बस को हज़ार करते हैं!! बस इरादा नहीं काफ़ी, नेकनीयती का, पहले ये कहिए क्यूँ हमें लाचार करते हैं?? क्यों कोई शराफ़त देखे उनकी, जो? सवाल पूछने पर गुनाहगार करते हैं? छोड़ दिया सड़क पर लाकर सबको, सरकार हाथ जोड़ मज़ाक करते हैं? भूख, प्यास मजबूरी से मर गए कई, कहते हैं, हम मन की बात करते हैं!! गलती नहीं मानते, पर माफ़ी मांग गए, तमाशे वो ऐसे सौ -हजार करते हैं! मिला बहाना तो इल्ज़ाम ज़िहाद का, नफ़रत से सरकार बड़ा प्यार करते हैं? बीमारी को मज़हब, जंग ओ जिहाद? दिलों में दीवार हो वो हालात करते हैं! कातिल हैं वो दवा की बात करते हैं, जानलेवा है वो जो इलाज़ करते हैं!

बूझो तो जानें!

रोक - टोक के बच्चन को, पप्पा, कैसे दिये बड़ाये, अपने मन की बात न चीनें, अब आपही कछू बुझाएं!! आपही कछू बुझाएं कि,  सब चुप्पी के मालिक, दुनिया जाये भाड़, तो का कर लेंगे गालिब, का कर लेंगे गालिब कि, बेच कलम सब खायें, खबरों की दुनिया में, सब सौदागर आये, आये सब सौदागर, सबका दाम लगायें, ख्वाब, इरादे, सपने अब पैकेट में आयें,  लाओ पैकेट में, तुम भी,  कोई बात निराली, शर्मा के का कीजे अब बिकती है लाली,  दिखती है लाली वो भी आँख में खून जमाये, मज़हव के रहनुमा रहम अब खुदा बचाये, खुदा बचाये किस किसको पैरवी सबकी तगड़ी, पैरों में पुजारी के, गरीब की पगड़ी,  कैसी पगड़ी गरीब को, शरम न आये, गिरवी रख के पगड़ी क्यों न भूख मिटाये? कौन मिटाये भुख, भूख किसकी मर जाये, ड़ाईटिंग पे है कोई कि फ़िगर ज़ीरो बन जाये,  ज़ीरो फ़िगर बन जाये ये शौक निराले, ऐ.सी. में मेहनत करके मर्द छे पैक बनाले, छह पैक के मर्द, हो गया बेड़ागरक, मरद और इंसान कि अब पहचान फ़रक!  अपनी ही पहचान से कहाँ है बच्चन वाकिफ़, यकीं के यतीम सब पप्पा मन माफ़िक पप्पा मन माफ़िक कहने को, किसका हुकुम बज...