बड़े फ़ायदे के नफ़रत के कारोबार हैं, सुना है आज़कल वो सरकार हैं! राम के नाम की सरकार हो गई, संविधान की बात हे'हराम हो गई! धर्म गिरा है या निचले कर्म हो गए हैं? इस दौर में ख़ासे बेशरम हो गए हैं अच्छे खासे आजकल राम हो गए, धर्म के धंदे आजकल तमाम हो गए! हो कोई धर्म राम नाम सत्य करते हैं, धार्मिक गुंडे कहाँ किसी से डरते हैं! क़ैद अब सत्ता का हथियार है, ये नहीं लोकतंत्र की सरकार है! सत्ता जब किसी को गुनहगार करती है, रोशनी की आड़ में अंधकार करती है! बंदूक आतंक है बंदूकधारी आतंकवादी, वर्दी को सौ खून माफ़, ये कैसी तरफ़दारी?
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।