"जो बोल नहीं सकते क्या उनको सुन सकते हैं? उनके दर्द को अपने दिल में क्या हम गुन सकते हैं?" ओ माँ और कितने कदम चलना है, छोटा बहुत हूँ और कितने दिन पलना है? ओ माँ ओ माँ तेरी आँखों में जो चमक है, तेरे प्यार में जो नमक है, क्यों फीके पड़ते हैं ओ माँ ओ माँ मैं दौड़ तो जाऊं, पर इतने लंबे रास्ते क्यों हैं, मेरे पैर नाचते क्यों हैं कांपते क्यों है ओ माँ ओ मां तेरा कंधा चुभता है, और सूरज भी, मेरे सर भी गठरी दे दे मैं भी बड़ा हो जाऊं ओ मां भूख बोलूं, प्यास बोलूं, क्या तू है उदास बोलूं तू बोले तो मैं बोलूं चुप हूँ अभी ओ मां
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।