बचपन से सिखाते हैं, मुझे "मैं" बनाते हैं, अलग करके सब से रिश्ते दिखाते हैं, जज़्बात जगाते हैं, प्यार, देखभाल, मदद हरहाल, इज़्ज़त, और फिर इन सब को सही-गलत, अपने-पराये छोटे-बड़े के दायरे में बंद कर नैतिकता बनाते हैं, चेतना बना कर सरहदों के कैदी बनाते हैं, इस तरह आज़ाद हो हम दुनिया में आते हैं!
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।