क्या है शाश्वत सत्य, सफ़ेद सच सच का ब्राह्म्णीकरण , या विश्व्यीकरण , झूठ का मुँह सदैव- क्यॊं काला होता है, यानी बोलते समय सच था, सामने आते आते काला हो गया, मैं मुर्ख हूँ , या ये रंगभेद है, गोरा बच्चा क्यों प्यारा होता है, और काला, बेचारा, बच्चे, भगवान का रुप होते हैं, बड़े होकर, क्यों इतने मुर्ख होते हैं? बनावट का दोष है, या ये दुनिया "फ़ेयर एंड़ लवली" का शब्दकोष है, भगवान मालिक है, और बड़ा अमीर भी, रंगभेद से इंसान पैदा करता है, और रंगों का ही सौदा करता है, सोचिये, दाल में काला ही क्यों होता है, जैसे कि, गोरा हुआ तो आप चबा जायेंगे? नाकों चनें? आपको मेरा कहा कड़वा लगता है, तो शायद सच ही होगा, वैसे भी कहीं सुना है, झुठ सफ़ेद और सच काला होता है, क्या आश्चर्य है, दुनिया में इतना घोटाला होता है, और झुठ पकड़ा गया तो उसका, मुँह काला करते है, क्यों? पहले क्या रंग था?
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।