मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है! आपके कदमॊं कि निशान हैं बस! मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है!! आप चलिए और वही आपका रास्ता है, आगे बढिए और अपना रास्ता बनिए, मुड कर देखिए और जानिए, आ पहुँचे, वो मोड़? फिर कभी उस पर न जाना हो, मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है समंदर में किसी नौका की टिमटिमाती रोशनी है! बस! - एंटोनियो मचाडो की मशहूर स्पेनिश कविता
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।