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भीड़ की रीड!

सवाल?  क्यों लोग लगे रहते है दिन भरने में,  रोज़-रोज़ वही करने में जिसमें जी नहीं? ये कहते हुए कि ये ज़िंदगी का सच है,  गुजारे की demand - too much है? क्या उऩ्हें मजबूर करता है? अपने अंतर से दूर करता है? क्यों ये सवाल? क्यों वक्त के मारों के जख्म पर नमक छिड़क रहे हो मेरे भाई ? चल रहे हैं वही जिंदगी ने जो राह दिखाई , आप ने सपनों को रास्ता बना लिया , अपनी मुश्किलों का नाश्ता बना लिया , आईने के सामने खड़े होकर सिर्फ़ अपनी खूबसूरती या  उसकी कमी को परखने कि जगह , आपने सवाल पूछ लिये ? तो लो अब भुगतो , अब आपको जिंदगी मज़े से जीनी पड़ेगी , कभी आप भी परेशानियों से अपना सर खुजाएंगे , ( तेल क्यों नहीं लगाते हीरो ) पर फ़िर भी मुस्काराऐंगे , आपने अपने सपनों को पालना सीखा है , पर घर और स्कूल में उनको टालना सिखाते हैं , और जरूरतों का क्या बतायें , उसकी परिभाषा कहां से लायें , देखो तो , लाखों हवा खा कर भी जिंदा हैं ? सवाल लाख टके का है ? ताकत किसके हाथ में है ? " कौन कहता है कि चक्की में पिसे रहो ?" घर - बाहर , स्कू...

एक बात की सौ बात!

खुद से दूर जाने की कोशिश तमाम की मैंने जाने अपनी कितनी नींदे हराम की, किसको नज़र आये चेहरे के रेगिस्थान क्यूँ अपनी सारी मुस्कराहट शमशान की? हमसफ़र, साथ देने के शौक तन्हा कर गए हाथ आये फ़ासले जब भी, राय कोई आम की शराफत के सब सौदाई, इतनी इज्ज़त-अफज़ाई कहाँ खरीददार कोई, जो दुकान-ए-ईमान की बंजर जमीन ने कितने इरादे चट्टान किये यूँ माथे की सारी परेशानी पीक-ए-पान की चलते रहे, यूँ अपने ही तूफानों के छोर थाम हमने कहाँ कभी अपनी, मुश्किल आसान की 

रास्ते के कंकड़

फुर्सत के दिन, या दिन में फुर्सत नहीं, देखिये करवट लेती हैं हसरतें कहीं, दिल की हरकतों के क्या दाम कीजे शौक अच्छे हैं, काम मत कीजे! हम अपना सफर होँगे, अपने रास्तों का असर होँगे, मील का पत्थर नहीं बनना, काबिल हमसफ़र होँगे उनके देखने में कुछ ऐसा असर, तलाश करते हैं कहीं कोई कसर, उम्मीद को क्या समझाएं, नज़र-अंदाज़ हैं या अंदाज़-ए-नज़र ! खुद को खोना है, खुद को प्यार करना उम्मीद से आज़ाद हो, फिर यार करना आपने सपने चुने, और हम काबिल बनें? तस्वीर आपकी, रंग हम क्यों  बनें? अधूरे अल्फाज़ रास्ता भटकते हैं, कदम कब इनकी राह तकते हैं,, हो गए अजनबी अनगिनत लम्हे, अब हम आइना तकते हैं ! वक़्त चलता है, फिसलता है, टलता है, निकलता है मुश्किल हैं ऐसे लम्हे जब खुद का साथ मिलता है चलता है, मुड़ता है, मिलता है बदलता है आपके पैरों से ही रास्ता निकलता है.... ख़ामोशी रास्ता ढूंड लेगी, तुम साथ चलते रहना खुद तक पहुँच जाओ तो अपना सलाम कहना,