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शीला की कहानी!

मर्दों की दुनिया सारी , घूरने की है बीमारी , शरम कभी न आनी माने न माने कोई , भाई – भतिज़ों की दुनिया बड़ी सुहानी माँ - बहनें घर में बैठें , बाहर कुछ और कहानी अब दिल करता है हौले हौले से किसी कि भी गले पड़ जायें , रिश्तों का मर्दों को बंधन क्या , बस अपना प्यार जतायें माँ कसम , माँ कसम , माँ कसम my name is शीला , शीला की बदनामी , रज़िया गुंड़ो में फ़ंस गयी और मुन्नी की नादानी गली गली गली के लड़के मुझे फ़ोलो फ़ोलो करते हें और जब में नज़र फ़ेरुं , बस ताने कसते हें , बेशरम , बदतमीज़ मरदुए हाय रे ऐसे चेपू हम , फ़ेविकोल बन चिपकें रे कितने तुम कपड़े पहनो , अपनी नज़रिया बरसे रे प्यास हमारी ऐसी , भूख हमारी ऐसी , शराफ़त है बेमानी दे दो रे ! दे दो रे ! दे दो रे ! शालू , शालू की नादानी , टेस्ट जलेबी बाई का और अनारकली की जवानी शर्म तुम्हारा गहना है , इसलिये कम पहना है , फ़िलिम ड़िरेक्टर कहते हें , एक बटन कम रहना है , और अगर मुँह खोलें तो कहें करेक्टर ढीला है , कौन है ये , कौन है ये , क्या  है ये लीला , मर्दों की सब लीला , श...