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देखते हैं, क्या?

जिसे देखते हैं,  वो भी देखता है, नज़र मिल रही है,  या बस एक इत्तफाक है, ये वो लम्हा है, जो खास है. और उसके पहले जो पल था, वो भी खास ही हुआ? नहीं तो ये मिलना इत्तफाक न हुआ? और नज़र में आ गए, उसके बाद?  वो भी खास ही हुआ न? नहीं तो वो लम्हा क्या बकवास हुआ? जिसके बाद कुछ न खास हुआ? नज़रिए की बात है,  सच एक लम्हा भी अगर जिंदगी का खास है, तो ताउम्र जिंदगी खास है देख सकें तो देखें, सच तमाम है इर्द–गिर्द, जो आप चुनेंगे, वो ही आपका खास है!!

टाईमपास!

वक्त टूट कर बिखरा पड़ा है, कहीं छोटा कहीं बड़ा है, 'तर', कहीं प्यासा पड़ा है, आख़िर में चिकना घड़ा है, कोई भी लम्हा कब तड़प उठता है, कोई पल मुँह बाएं खड़ा है, कोई घड़ी, हाथ से फिसलती है, कोई सदी बन टिकी है, कोई इंतज़ार उम्र होता है, कोई पलक झपकते गुम, और इस खेल में कहाँ हैं हम? कभी वक्त फ़ायदा है, कभी सारी मुसीबतों की जड़, कभी हाथ नहीं आता, समय, कभी मौसम बन छा जाता है, किसी को रास नहीं, किसी को भा जाता है? किसी के गले तलवार, किसी के लिए घुड़सवार, किसी के पास समय नहीं, बिल्कुल भी, वक्त किसी का बचा नहीं, हमें कुछ हो, समय का क्या जाता है, बेशर्म! वही अपने रास्ते चला, वक्त बहुरूपिया है, हर पल, घड़ी, लम्हा युग, काल,  बदलता है, फिर भी, रुका है किसी के लिए, किसी को लगे  चलता है! बदल रहे हैं आप, समय को, या समय आपको बदलता है? बात गहरी है, और टाईमपास भी, है आपके पास? टाईम?

खूबसूरत किस सूरत!?

खूबसूरती, लम्हा है, कोशिश नहीं, नज़र आए, घर कर लीजे, मुगालता, (के) फिर कर लीजे आप भी हिस्सा हैं इसका, पर ये आपकी सिर्फ़ बात नहीं, आपके हाथ से हो, आपके हाथ नहीं! खेल है, मेल का, जोड़तोड़ का, जुड़ने का, मुड़ने का, पंख कोई, किसी के, ले कर उड़ने का खूबसूरती सोच है, सवाल है, एक उम्दा ख़्याल है, वक़्त पर हुआ मलाल है, सिहरन जगाए सो ताल है, जो पलक झपक जाए, मंद मुस्कराए, चुप से छू जाए, हवा हो जाए, खूबसूरती परिभाषा नहीं, यकीन भी है, गुमां भी, खाली हाथ और सामां भी! दो सांसों के बीच एक ख़ाली जगह एक लम्हा रास का, ख़ास सा और पास का!!