सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

path लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सफ़र असर

  चलते फिरते, भागते भागते घूमते रस्ते तेज धीमे  बदलते वास्ते बनते बिगड़ते, आसान, मुश्किल रास्तों से वास्ते, जाना तय है, और पहुँचना? कहां हैं? वो कोई एहसास है, या कोई जगह है? और साथ किसका, कौन सी वजह है? तमाम रिश्तों की जुड़ती कड़ियां  सफ़र हैं, रस्ते, मोड़, मकाम तमाम, घर- दुकान, वीरां मैदान पेड़ उगते उखड़ते, पानी पहाड़, पिघलती बर्फ, बहती धाराएं क्या इनका असर है? बिना उस असर के क्या सफ़र सफ़र है?

रास्तों से वास्ते!

  रास्तों से बातें, या बातें करते रास्ते? रास्ते- कहां हो, कहां जा रहे हो,  किसके वास्ते? भाग क्यों रहे हो, जरा आस्ते-आस्ते! बदल रहे हो या बस चल रहे हो? भीड़ में अकेले और अकेलेपन की भीड़? क्यों मुड़ती जा रही है रीढ़? मैं- और तुम कहां चल रहे हो? ढल रहे हो, पिघल रहे हो, खड़े खड़े, या बैठे-बैठे, या लेटे, कहीं जाते नहीं दिखते, फिर क्यों गुम हो रहे हो? नीयत है या नियत? कैसे भरोसा करें तुम्हारा, न कोई ठौर है, न ठिकाना, न कोई आना-जाना रास्ते - हम साथ है, ठहरे को ठहराव, चलते को सर आंखों लेते हैं, एक साथ दोनों काम कर लेते हैं, हम कदम नहीं गिनते, न मुसाफ़िर चुनते, हम हैं ही कहां? हम चलने से बनते हैं, जहां कोई नहीं चलता, वहां रास्ता नहीं मिलता! क्या अकेले होने से  कोई इंसान बनता है? रास्ते - हम साथ है, ठहरे को ठहराव, चलते को सर आंखों लेते हैं, एक साथ दोनों काम कर लेते हैं, हम कदम नहीं गिनते, न मुसाफ़िर चुनते, हम हैं ही कहां? हम चलने से बनते हैं, जहां कोई नहीं चलता, वहां रास्ता नहीं मिलता! क्या अकेले होने से  कोई इंसान बनता है?

रास्ते!!

  यूं गुजर रहे है की जैसे रास्ता हैं, कुछ होना नहीं, कुछ बनना नहीं, साथ सब के हैं, किसी के हाथ नहीं, अगर मुश्किल हो  तो वो रास्ता नहीं, रास्ते किसी के रास्ते नहीं आते, और कभी भटकाते नहीं हैं! रास्ते कहीं जाते नहीं हैं, कहीं पहुंचाते नहीं हैं, रास्ते बस शून्य हैं, अपने आप में कुछ नहीं, पर कोई साथ ले, तो सौ-हजार हैं, जरूरी हमसफ़र है, आपसी व्यवहार हैं! अपने कदमों से पूछिए! क्या वो इस दोस्ती तैयार हैं? मंजिलों से घिरे हुए हैं, फिर भी रास्ते आज़ाद हैं, जो ये समझ जाए वो मुसाफ़िर है, सफ़र ही उसका आख़िर है, समझ पाएं तो, जिंदगी भी एक रास्ता है, आने और जाने के बीच से गुजरते, रुकने का सोच रहे हैं? मूरख, आप जागते भी सो रहे हैं!!

रास्ते कहिन!

  रास्ते हैं, जिंदगी से यही अपने वास्ते हैं, कहां पहुंचेंगे, ये सवाल बेमानी है, मोड़ आयेंगे,  मुड़ जाइए, कभी भटक जाएंगे कभी खो जायेंगे, ढूंढने आपको रास्ते ही आयेंगे रास्ते आपको कम नहीं करते, न ही साथ छोड़ते, कभी लड़खड़ाए, कभी छिल गए घुटने रास्ते बस कह रहे रुकने, संभलने, जरूरत समझ बदलने! भागते क्यों हैं? करिए अपने कदमों का यकीं!

एक एक कदम!

हर कदम  पूरा सफर है, उसके बिना  अधूरा सफर है, पहला कदम  शरुवात है, पूरी, दू सरा,  इरादों की मंजूरी, तीसरा, नीयत जरूरी, और एक कदम, काबिलियत और एक कदम तैयारी, जज़्बा, हिम्मत, कुव्वत, शौक, पूरा होश, और जोश, एक और, और एक, साबित कदमी कुछ और यकीन, और, कुछ मोड़ आख़िरकार  सामने नज़र, चंद और कदम और चार कदम जरूरी, तीन कोस दूरी, दो बातें अधूरी, एक होती जिस्म और रूह , अंत है या शुरुवात, फिर किसने रोक रखा है? बस एक कदम  पूरा करिए, सामने है, दूरी पूरी करिए, बस एक कदम, वो ही सफर है, वो ही दूरी, वो ही जरूरी, बात उसी से पूरी, बाकी सब बातें हैं अधूरी!

हर सफ़र हमसफ़र!

हम सफ़र के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते, हर तरह के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते!! चलना तो शुरू कीजिए, कदम आस्ते, आस्ते, मिल जाएंगे हम जब साथ आएंगे अपने रास्ते! साथ चलते चलते बनेंगे हमसफ़री के रास्ते ये सोच कर चल पड़े हम हमसफ़र के रास्ते! क्या चलें, किस मोड़ मुड़ें, आसां नहीं ये रास्ते हर मोड़ पर मिल जाएंगे हमसफ़र के वास्ते! हमसफ़र से जो सफ़र हैं बस सफ़र के वास्ते, कहाँ जाएं, कब पहुंचें इससे नहीं कोई वास्ते! कहां जाएं, कहां पहुंचे और किस के वास्ते? रास्ते कुछ तन्हा, कुछ हमसफर के साथ के!

रास्ता मुसाफ़िर!

मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है! आपके कदमॊं कि निशान हैं बस! मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है!! आप चलिए और वही आपका रास्ता है,  आगे बढिए और अपना रास्ता बनिए,  मुड कर देखिए और जानिए, आ पहुँचे, वो मोड़? फिर कभी उस पर न जाना हो, मुसाफ़िर, कोई रास्ता नहीं है समंदर में किसी नौका की टिमटिमाती रोशनी है! बस! - एंटोनियो मचाडो की मशहूर स्पेनिश कविता 

रास्ते अनकहे!

रास्ते, चलते हुए, यहां-वहां जहां-तहां हर ओर से निकलते हुए, हर लम्हा, एक एक पल हमसफ़र बनने तैयार, आप कहाँ अकेले हैं? सफ़र में? "ट्रस्ट द प्रोसेस" रास्ते किसी को रोकते नहीं, कभी टोकते नहीं, 'नज़र नहीं आते?' आप कदम क्यों नहीं उठाते, फिर कहिए, क्यों? मेरे पैरों के नीचे नहीं आते? क्यों अपने शक आज़माते हैं? शक नए रास्तों से घबराते हैं! अपने कदमों को अपना यकीन कीजे, आसमाँ-अरमान को जमीन कीजे, मुमकिन? .....सफ़र में Swati साथ☺️

पास समंदर!

 पास समंदर  और दूर तक, साथ भी ओ अपने आप भी, मिले भी ओ अंजान भी, पहचान हुई, बस नाम की, किनारे ज़रा तर लिए, चुल्लू भर लम्हे लिए, आए ओ गुज़र लिए, ठहरना क्या है? क्यों है? सफ़र भी घर है, रास्ते कभी, किसी को रोकते नहीं!! चलिए, बह लीजिए!

चलता समंदर!

चलना है, चलते रहना है, रास्ता ज़िन्दगी और ज़िन्दगी रास्ता, रुकना क्या है? एक लंबी सांस, हाथ फिसलती आस, सफ़र की प्यास, मोड़ की तलाश, कोई लम्हा ख़ास, कोई पल उदास, एक लंबी सांस, उठिये, चलिये, चलना है, चलते रहना है, पहुंचना क्या है? मंज़िल, मक़ाम, ख़त्म मुश्किल या काम तमाम, मुग़ालता, गुमान, झूठी शान, मीठा पान, हसीं शाम, लंबी सांस लीजिए, कल फिर नए मायने, नए अंजाम, चलना है, चलते रहना है, ज़िन्दगी लहर है, सुबह भी है ओ शामो सहर है, न ख़त्म होने की चीज़, न रुकने की, आप चले या रुकें, थकें, ज़िन्दगी जियें या घूँट घूँट पियें, ज़िन्दगी आप को ज़ी रही है, चलना है? रुकना अपने आप को छलना है!

क़ाबिल सफ़र!

एक सफ़र के पुरे हो गये, ज़िन्दगी को ज़रा अधूरे हो गए, बाँट आये लम्हे अज़ीज़ कई मोड़, और चंद रिश्तों के मज़बुरे हो गए! अंजान जगह थीं और, हर कोई अपना निकला, सच जो भी आया सामने, सपना निकला! अज़नबी बन बन यक़ीन सामने आते रहे, काम अपना था और अपने काम आते रहे हर लम्हा लोग मुस्कराते रहे, यूँ सब अपनी बात समझाते रहे। अपने इरादों के सब काबिल निकले, हमें उस्ताद कहें ऐसे सब फ़ाज़िल निकले! आ जाइए तशरीफ़ लेकर जब मर्ज़ी, दावत है, सीख़ ही जायेंगे कुछ तो, रवैया है, आदत है और एक सफ़र मकाम हो गया,  मुसाफ़िर का काम आसान हो गया! इतने ठिकाने मिले दिल घर करने को,  अपने से ही हम ज़रा बेगाने हो गये! अधूरे फ़िर अपने फ़साने हो गये,  कुछ वो बहके कुछ हम दीवाने हो गये!