सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

RSS लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अखूंड भारत!

 हिंदू धर्म करो, थोड़ी शर्म करो, थोड़ी और, नहीं, इतनी काफी नहीं! कितनी भी काफी नहीं! और अगर गर्व है तो, उठो, नाम पूछो  राम पूछो! और अगर शक है, तो गर्व करो, पर्व करो, उसके सर को धड़ के दूसरी तरफ करो, न बांस रहे न बासुंरी, बस रेप, त्रिशूल, छुरी! फिर बस बचेंगे हिंदू, देश में, दिमाग में, सोच में, समाज में, जगह कम ही पड़ेगी, तंग सोच को, लगनी भी कितनी है, कातिलों का झुंड, भारत अखुंड!

नफ़रत से प्यार!

चलो थोड़ी और नफ़रत करते हैं, खून में अपने ज़रा ज़हर भरते हैं, ज़िंदगी में सफल होने का ये प्रधान मंत्र है! शाह और मात के खेल में हिंसा शाषन तंत्र हैं! नफ़रत की गोदी में हिंसा पलती है, समय आने पर ज़हर उगलती है! नफ़रत काम आसान करती है, भीड़ को हिंदू मुसलमान करती है, जिसकी सरकार उसकी धौंस, लोकतंत्र बहुमत का खेल है, जो कम है वो फेल है! शाश्वत सत्य यही बात है, जो कम है वो उसका बुरा कर्म है, बुरे की हार है, यही हिंदुत्व व्यवहार है! चलो फिर दिल में नफ़रत जगाओ, हिंसा का अलख जगाओ, अगर अपनी नफ़रत पर तुम्हें शान है, तो यही सच्ची भक्ति की पहचान है! श्रेष्ठ कुल रीत सदा चली आई, नफ़रत ही ने जात चलाई, जो कम है वो अक्षम है! ढोर गंवार शुद्र पशु तन है! तिरस्कार इनका है जरूरी, बराबरी से रखो दूरी! भारत को हिंदू स्थान करो, धर्म नाम पर पाप करो, पापों का जो घड़ा भरे, धुल जाए सब गंग तरे! निर्भय हो तुम वीर बनो, नफ़रत के तुम तीर बनो! रीढ़ अपनी कर दो अर्पण, बुद्धि अपनी भेंट चढ़ाओ, मार किसी को अमर बन जाओ! रामराज में रम जाओ!

मरता क्या न करता?

मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, गधे नेता वोटों की घांस चर रहे हैं? मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, सांसे कम पड़ रही हैं, और हस्पताल! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, चुल्लू काफ़ी फिर भी गंगा तर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, भगवान बचाए, सो वो रास्ता कर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, फिर भी लाखों सच से मुकर रहे हैं? सरकार निकम्मी है, नाकार और दुष्ट, मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं! इलाज के लिए दर दर भटक रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, साहेब तस्वीर में फिर भी चमक रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, भूखे, मजदूर, लाचार, दो मौत मर रहे हैं! देशभक्ति में सवाल न पूछने मजबूर हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, कोविड मरीज़ दाढ़ी जैसे बड़ रहे हैं! किसकी? दवा और दुआ दोनों ही मुकर रहे हैं! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं!! मरते क्या न करते इसलिए मर रहे हैं, वोट आपके बड़ा कमाल कर रहे हैं?

आबाद तबाही!

तबाही में सब आबाद होते हैं, यूं इस मुल्क में बरबाद होते हैं। चौखट पर बैठे हैं हैवानियत के, इस दौर में जो नाबाद होते हैं? एक ही बीमारी के सब मरीज़, नफ़रत के अपनी धारदार होते हैं! मज़लूम हैं वो ही बर्बाद हैं, ओ हम पूंजीवाद के क्यों तरफ़दार होते हैं? ख़ुद से सोचना गुम होता हुनर है, हवा की रुख के अब सवार होते हैं! पेशेवर सब नए गुलाम हैं काबिल, हुक़्म कोई भी हो, सब तैयार होते हैं! क्या मजाल किसी की, अलग सोच ले, जो हैं वो सब दर रोज़ गिरफ़्तार होते हैं!

उम्र जान!

चीज़ क्या है संविधान क्या जान कीजिए? लाठी को मिलेगी भैंस ये ही कानून लीजिए! कब सोचा था सर पड़ेंगे ऐसे फिरकापरस्त, मुश्किल न हो आखों पर रेबान लीजिए!! आंखों में उनके सरम कैसे ये मान लीजिए, कपड़ों को देख कर उन्हें पहचान लीजिए! इस हिंदुत्व-स्थान में आपको आना है बार बार, पहले अपने जमीर की ख़ुद जान लीजिए!                          किस ने कहा कि आपका भी है हिंदुस्तान? पहले हज़ार बार जुबां पे श्री राम लीजिए !!! होंगे आप सिक्ख, ख्रिस्ती या मुसलमान, हिंदू का है हिंदुस्तान पहले मान लीजिए!! बड़े प्यार से करते हैं वो नफ़रतों की बात, लीचिंग की बात आप ज़रा आसान लीजिए! मुल्क चीज़ ही क्या, काहे मेरी जान लीजिए, नफ़रत के हर तरफ चलो बागवान कीजिए! भूखे भजन नहीं होता ये है पुरानी बात, करोड़ों का है काम जो श्रीराम कीजिए!!

वहाटीज़ अप?

आज आईटी सेल से आपके व्हाट्सअप पर क्या खबर आई? रॉफेल के कागज पर किसी ने पकौड़ी खाई? चाय पर चर्चा जोरदार थी बड़ा रंग लाई, बालाकोट में कितने मरे, अलग अलग गिनती बताई! बेरोज़गारी छप्पर फाड़ कर आसमान चली आई, नौकरी तो बहुत हैं पर नौजवान लेने नहीं आई!!  TV पर पाकिस्तानी हमले से देशभक्ति जाग आई, ऐसे में नौकरी खोजने केवल देशद्रोही जा पाई!! देश के हालात में जबरजस्त तरक्की आई, हर गली कूचे में आज़ाद घूम रही गाय माई!! स्वच्छ भारत का कचरा कम करने को आई, एक तीर से दो शिकार यही कहलाई☺️! गाय की गाय, चाय की चाय!! अपोजिशन के हल्ले से रॉफेल आने देर लगाई, इसलिए रॉफेल के कागज की हवाई जहाज़ उड़ाई! कचहरी में कह दियेन मीलॉर्ड, का जानें कौन चुराई! पब्लिक बुड़वक ये बात इनको कौन समझाई? चौकिदार के चौकड़ीदार सामने आ रही है सच्चाई, पर धर्म के नाम पर आँख पट्टी बांधे वो कैसे हटाईं? मूरख भरोसा कर बैठे के मंदिर वहीं बनाई? राम के नाम के धंधे में बहुते कमाई! पैसा तो छोड़ी, भर भर वोट भी आई!! जो ज्यादा चूँ-चपड़ करे उसकी ले ठुकाई! कतना झूठ बोलेगा, कोई ज़रा बताई?

मजबूर नफ़रत

अपनी जंग के सब मजबूर हैं, सच्चाई के कौन जी-हुज़ूर हैं? गुस्से में इतने के खुद से दूर हैं, कैसी मुल्कीयत के पाकिस्तान ज़रूर है? आवाज़ अलग है तो उसको जला देंगे, कौन इंसान जिसको खून जरूर है? नफ़रत के कितने सब मंज़ूर हैं, क्या कीजे के आदमखोर हुज़ूर हैं! सच छुप जाए यूँ के हम मग़रूर हैं, डरी हुई आवाम को छप्पन जरूर है! इंसान ही इंसान को काफ़ी पड़ेगा, कौन कहता है क़यामत जरूर है? लाज़िम है के खामोशी एक राय है, कुछ तो इशारा हो के नामंजूर है? दूध का रंग सुर्ख नज़र आता है, क्यों रगों में आज इतना सुरूर है? मूरख गिन रहे हैं अपने और उनके, आख़िरकार इंसान को इंसान जरूर है!

दौर-ए-सियासत!

सरकार दीवार बन गयी है, व्यवस्था ज़ंजीर बनी है, जमूहरियत में कैसी ये, तानाशाह तस्वीर बनी है? गुलामी के दौर हैं, गुलामों की सियासत है, किसके मथ्थे जड़ें,  अज़ीब ये हालात हैं   ज़महूरियत तानाशाह बन गयी है, फ़ासिवाद की पनाह बन गयी है! डर सारे यकीन बन गये हैं, सच जिद्द बन गयी है ,सियासत की, ज़ुल्म है, जो बिन पूछे बगावत की! हर एक कत्ल जन्म देता है नफ़रत को,   ये कौन सी फ़सल की तैयारी है, कौन सी नस्ल की! रोज़ होते हैं, हर और हर हाल, गुनाह नहीं है तहज़ीब का सवाल! दुनिया गयी भाड़ में, तरक्की की आढ में, छाया काट रहे हैं, सब धूप के जुगाड़ में! सियासत साज़िश बन गयी है, फ़िरकापरस्ती नवाज़िश, इंकलाब की सिफ़ारिश है, खामोशी अब मुहलिक(Fatal) है!

कमल की कीचड़!

हाल बताते हैं कि हालात क्या होंगे! लातों के भूत से सवालत क्या होंगे! माना छप्पन का सीना, पर खोखला है, ये आदमी पूरा का पूरा ढकोसला है! छप्पन का सीना है, कि कोई बड़ा कमीना है, ईलेक्शन का महीने में अब बीबी को चीना है! अगर करते हप अपनी बीबी से प्यार तो मोदी सरकार से करो इनकार ! नाम बेचते हैं अपना और अपने ही गुण गाते हैं, कैसी भूख है कि अपनी शरम बेच के खाते हैं! कलयुग कहते हैं कमल से कीचड़ बहती है, सिरफ़िरी दुनिया उसे मोदी कहती है!! नाम नरिंदर, सीना धरमिनदर, मूँ मिंया मिठ्ठू है, शेर की खाल में छुपा भेड़िया संघ का ट्ट्टू है!

भा. ग. जा!

मंदिर यहीं बनाएंगे, मूरख कौन समझाएंगे, लौटते में बुद्धू कई घर फ़ूँक आयेंगे! दुनिया बड़ी भ्रष्ट है आपको बड़ा कष्ट है, फ़ासीवादी ताकतों से पर क्यों एड़जस्ट है! शब्द का फ़ेर है, देर है अंधेर है, जागे हैं आप या अभी थोड़ी देर है! कमल से कीचड़ निकलेगी संभल के धरिये, ग्ंदगी फ़ैलाने का इससे बेहतर तरीका क्या? समझ समझ का फ़ेर है ये आम है कि बेर है, चश्मे उतार के देखिये ये देर नहीं अंधेर है चारों और चमकती है, आज कल रोशनी बिकती है, कोई भी अखबार देख लीजे वो तस्वीर किसकी है हमारा सच एक,धर्म एक, मालिक एक, दूसरा कुछ भी हमारे त्रिशूल को भेंट!

राम नाम सत्य है!

लगता है आप किसी संघ फ़ेमिली से आते हैं ? या उनके बेचे हुए सच आप को फ़ुसलाते हैं ? क्या घड़ियाली आँसू आप को खूब भाते हैं ?  चलो अंग्रेज़ों को आका बनाते हैं वीर सावरकर कहलाते हैं , वैसे आजकल मोदी कहे जाते हैं , हिंदू होना सबको सिखाते हैं , अपने हर शहर में पाकिस्तान बनाते हैं , हम हिंदू धर्म के सेनापति हैं , जात पात हमारी शान है , जात की क्या लड़ाई , सत्य Brahmin/ ब्राह्मण है यही राम है , जात के नाम पर मत लड़ो , नीच जात जाओ सड़ो ! हम कमल तुम कीचड़ , दुर हटो लीचड़ हम रथ वाले, हमसे क्या मुकाबला करोगे , जानी , तमाम शहीद हो गये , तारीफ़ है अड़वाणी जय श्री राम , सब के सब मरोगे हम भगवान के दूत हैं , सारे दंगे इस का सबूत हैं , ( ये सच है कि जितने दंगे आज तक आज़ाद भारत में हुए हैं उनमें मुसलमान मृतकों का बहूमत रहा है , जाहिर है मारने वालों में किस का बहुमत होगा ) मारते वक्त हम उम्र और हैसियत का लिहाज़ नहीं करते , चाहे एहसान जाफ़री हों या गर्भवति शमीना हम अपने इरादों पर ' अटल ' हैं , चलो बच्चों को सच का इतिहास पड़ाते हैं , नाथूराम गोड़से क...

भगवा जहर!

एक वो जहर जो मार देता है , एक वो जो विचार देता है , नफ़रत हमें तैयार देता है , सफ़ेद झूठ जो सच बन के ऐंठते हैं जो गेहरे पैंठते हैं , दिलो-यकीं में जाके बैठते हैं , दो अलग अलग दो को चार करता है , नमक मिर्च मसाला ड़ाल अचार करता है ! लड़की मुस्लिम थी , लड़के पाकिस्तान , ऐ . के . 47, अब आप अपना अपना सच बना लीजिये , अरे हां , वो जो बचपन से सुने हैं माँ - बाप , चचा से , वो भगवा सच अब जवान हो गये हैं , नमक , मिर्च , मसाला “ मुस्लिम से कभी शादी मत करना . . . ” जय सिया राम , “ जनसंख्या बड़ाने के लिये बच्चे करते हैं . . .", कृष्ण हरि हरि , “ पाकिस्तान को ज्यादा प्यार करते हैं . . . " शिव शिव “ पानी मत पीना थूक कर देते हैं . . . ” जय हनुमान , अब कहती रहे माँ माथा पीट - पीट के , मेरी बच्ची मासूम थी , पुलिस कह रही है , कानून बोलता है , पर भगवा आँखों पर पड़ा है पर्दा सच पे तमाम गर्दा पड़ा है , कौन ज़हमत करे अब हमने उसे आतंकी मान लिया है , " और वैसे भी वो मुसलमान थी , तो ये कोई आश्चर्य की बात नही ये लोग होते ही ऐसे...

लापता रंग!

कहते हैं आज़ाद है, सुनाई देता है, फ़िर क्यों  लगता है ये झुठी आवाज़ है, प्रश्न सर उठाते है, ' आज़ाद है ' कौन, किससे, कब, कहां  ? क्या नहीं दिखता ? दबा, झुका, सिमटा, रुका, अटका,भटका पस्त, लाचार, रेंगता, लड़खड़ाता आपको नज़र नहीं आता? जाहिर है, आप सावधान में खड़े हैं अपनी मान्यताओं में गड़े हैं  नज़र उपर है, क्योंकि झंड़े खड़े हैं, और पांव तले रेंगते हुए सच, नज़र नहीं आते    जाने दीजिये, आपकी मज़बुरी है, आप आज़ाद हैं ये जश्न आपको मुबारक हो!