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सब चंगा सी!

लॉकडाउन चालिसी, दोष तब्लीसी, जिम्मेदारी बदलिसी मूरख पब्लिसी! मुसीबत असलिसी मदद नकलिसी, सब चंगा सी! मजदूर पैदलसी भूखे बेहदसी, नफ़रत निकलिसी, बीमारी चीनीसी, टेस्टिंग कछुए सी, सब चंगा सी! लॉकडाउन चालेसी,  चार बार लागेसी लाख पास आलेसी, सरकार जालीसी, या सोई, आलसी, मूँह में गालीसी, वादे लाखों से नीयत जाली सी सब चंगा सी! हाथ फ़ैले सी झोली खाली सी, भुखी प्यासी.   बेटी रुंआसी, हरसू बदहवासी इतनी उदासी,  सब चंगा सी!

सरकारी सरकार!

सब व्यवस्था सरकारी है, सारा इंतजाम  परदेश से घर लाए जहाज सरकारी थे, और मज़दूर चढ़ नहीं पाए वो बस ट्रेन सरकारी है भूख सरकारी नहीं है, डर और चिंता भी! लोकडाउन सरकारी है, बीमारी सरकारी है!! सड़क सरकारी है, चलने वाले नहीं, मरने वाले रास्ते में अपनी मौत मरे हैं! मरने वालों की लिस्ट सरकारी है, हस्पताल सरकारी है, डॉक्टर नर्स भी, जो शिकायत कर रहे हैं, वो उनकी निज़ी बात है, जिस कमी की बात है, वो कमी सरकारी है, आपसे मतलब? सूचना सरकारी है, जानकारी सरकारी है, उसके अलावा कोई कुछ कहे, तो जेल सरकारी है, पुलिस सरकारी है, उनके डंडे सरकारी हैं, डंडों के निशान आपके, चोट का दर्द आपका, जो गालियां आपने खाईं, वो सिपाही की थीं, पर उनका गुस्सा सरकारी है! कानून सरकारी है, सुप्रीम कोर्ट के जज सरकारी हैं, फैंसले सरकारी हैं, आपको अगर गलत लगें तो, आपकी अपनी राय है, आपकी मन की बात, दो कौड़ी की नहीं, सरकार जो कहे, गलत या सही, वो बात सरकारी है! सरकार माई-बाप है,

ढाई आखर दर्द के!

सुनने वाले बहुत हैं पर किसको कान करें?  ग़रीब हमारे दर्द हैं, कैसे यूँ बरबाद करें?  घर पहुंच जायँगे सोच चलते हैं,  कोई नहीं तो मौत से मिलते हैं!!  दर्द कहाँ हुआ,  आह कहाँ निकली!  सुना कहाँ किस ने,  क्या वजह निकली?  सुनते हैं दर्द अगर तो बहरे कान कीजिए,  कोसों चलते मजलूम आप अंजान कीजिए! रोटियां यतीम हो गयीं भूख के दौर में, दर्द गुमशुदा हैं सारे, तालियों के शोर में!   मौसम बदला है और वक्त ठहरा हुआ है, भूखा है दर्द और बहुत गहरा हुआ है! हर एक कदम दर्द से मुलाकात है, जाने समझें उन्हें कहां ऐसे हालात हैं? सुना है घर बैठे भी आप को दर्द हुआ, बहुत देर टी वी पर हमारा चर्चा हुआ!!

दिया तले जिया जले!

अंधेरे को रोशनी से छुपाने का हमराह किया है, चकाचौंध ने हमेशा ही सबको गुमराह किया है अंधेरे छुपाने को रोशनी बुलाए हैं, मोम हो रही सारी विधाएं हैं! अंधेरों को छुपाने रोशनी की साज़िश है, आँख बंद कर बैठिए, बड़ी नवाज़िश है!! अंधेरों को छुपाने के लिए रोशनी बुलाई है, ज़रा डॉक्टरों से पूछ लेते जो हजार कमी आई हैं? जला जला के मोम को दिए सबको बहकाए, दिए तले अंधेरा है मूरख काहे तू ये भुलाए! स्याह इरादे हैं और रोशनी के वादे हैं, रोशनी सामने कर सच से सब भागे हैं! सवाल नहीं हैं तो बेमतलब आप जागे हैं!  हाथ धरे बैठे थे अभी आंख खुल आई है, निकम्मेपन से सरकार के ये नौबत आई है!! अंदर के अंधकार को छुपाते रहिए, झूठी फिक्र को बस जलाते रहिए! लालटेन अंधेरे से सवाल करती है, आंख बंद कर हामी नहीं भरती! रोशनी वो जो रास्ता दिखाए, वो नहीं जो आंखों पर्दा कर जाए! रोशनी से अंधेरों‌ को छुपाएंगे,   बाज़ीगर वो आप जमूरा कहलाएंगे!  हर चीज़ तमाशा है, हर बात तमाशा, बहुत आशा है सबकी , वाह वाह तमाशा!! कहते सबके साथ हैं, धरे हा...