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हर सफ़र हमसफ़र!

हम सफ़र के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते, हर तरह के हमसफ़र हैं हर सफ़र के वास्ते!! चलना तो शुरू कीजिए, कदम आस्ते, आस्ते, मिल जाएंगे हम जब साथ आएंगे अपने रास्ते! साथ चलते चलते बनेंगे हमसफ़री के रास्ते ये सोच कर चल पड़े हम हमसफ़र के रास्ते! क्या चलें, किस मोड़ मुड़ें, आसां नहीं ये रास्ते हर मोड़ पर मिल जाएंगे हमसफ़र के वास्ते! हमसफ़र से जो सफ़र हैं बस सफ़र के वास्ते, कहाँ जाएं, कब पहुंचें इससे नहीं कोई वास्ते! कहां जाएं, कहां पहुंचे और किस के वास्ते? रास्ते कुछ तन्हा, कुछ हमसफर के साथ के!

मुकम्मल ख्वाब!

कुछ सवाल थे जिनके जवाब मिले थे एक शख्स कि शक्ल में ख्वाब मिले थे! वक़्त चलने-ठहरने के राज़ मिले थे , कल की क्या सोचें जो आज मिले थे!  बेशक्ल सपने थे फ़िरते आवारा से, ऐसे कुछ हालात ज़ब आप मिले थे! सपनों को पालने के शौकीन नहीं थे,  क्या करें वो जो ऐसे लाज़वाब मिले थे! सोये हुए कितने ख्वाब सुबह गुम हुए जागे हुए थे जब हमको आप मिले थे! यूं‌ नहीं कि तराजू लिये फ़िरते हैं हम, कुछ यकीन जो बराबर नाप मिले थे! न मन्नत माँगी, न चराग लिये घूमे, इत्तफ़ाकन ही कभी हम-आप मिले थे! मुसाफ़िर हैं सभी किसी न किसी सफ़र के, फ़िर कंधे मिले गये ओ कभी हाथ मिले थे! न इक़रार हुआ कभी और न इनंकार हम उनसे मिल गये वो हमसे मिले थे! न हाल ठीक था, न हालात मुफ़ीद* थे, जिद्दियों के आगे किसकी दाल गले थे? मुफ़ीद - Favourable

मोहब्बत फ़रीद!

सफ़र में तुमसे मुलाक़ात हो जाए, हमसफरी के ज़रा हालात हो जाएं! हम तो मुसाफ़िर हैं ज़िन्दगी के, बस उनके भी यही हालात हो जाएं!! मोहब्बत है झोली में और आरजू करते हैं, मेरी किसी ख़ासियत को वो मुरीद हो जाएं! यूँ तो हम अपने ही पैरों पर खड़े हैं, हसरत, की वो कंधो के करीब हो जाएं! यूँ हम अकेले ही अपनी नाक में दम करते हैं, जी करता है मेरी मुश्किलों की ख़रीद हो जाये! इस रस्ते आइये तो हम भी एक मक़ाम हैं, दुआ है, ये सफ़र आपको फ़रीद हो जाए! (farid -unique) इंतज़ार है पर हम कभी करते नहीं, कौन जाने कब, यकीं इतफ़ाक हो जाए! बेबाक़ी को मेरी बेसबरी मत समझिये, क्या हरकत जो होना है सो हो जाये!

हम तुम

गुम हैं, कभी खुद में, कभी तुम में, कभी हम में, हम हैं, कभी साथ, कभी अकेले, कभी साथ अकेले, तुम हो, कभी साथ, कभी अकेले, कभी तुम, प्यार है,         इश्क भी,           और मोहब्बत इक़रार भी,    कभी अश्क़,        कभी बंदगी तक़रार भी,    कभी रश्क़।        कभी बगावत सरसवार भी,  कभी फ़रहत       दिलअज़ीज़ आदत                            (bliss) गम हैं, ख़ुशी भी, शिकायत भी, शरारत भी ज़ख्म हैं, दवा है, दर्द भी, और दुआ भी नज़दीकी, कभी रूमानी, कभी रूहानी, कभी बेमानी हामी, कभी इनकार, कभी तक़रार, कभी इसरार मानी, कभी मनमानी, कभी बेमानी, कभी नानी😊 दूरी, कभी खुद से, कभी तुमसे, कभी अनबन से रास्ते कभी अपने कभी सपने कभी चखने मोड़, कभी बहकाते कभी बहलाते कभी संभलाते दोनों की अलग फ़ितरत, हर आदत, साथ क़यामत दोनों की एक सोच, साथ की दुनिया हालात की तमाम ताल्लुक़ात की ...

हम सफ़र!

हो गयी मोहब्बत है तो गले मिल लीजे, बात आगे बड़ गयी तो मुश्किल होगी! इकरार है तो सफ़र साथ कर लीजे, यूँ नहीं कि सपनों में सबर कीजे! नासमझी का एक और नाम मोहब्बत है, वरना इंसा-इंसा में फ़रक कोई करता है? है चार दिन जिंदगी ये तय किये बैठा हूँ,  कहाँ जाऊं कि तुझे दिल किये बैठा हूँ!! हम सफ़र हैं तो कभी मोड़ आयेंगे, हमसफ़र हैं क्या कभी छोड़ पायेंगे! मोहब्बत है तो शिकायत की गुंजाईश नहीं, पसंद न आये ये ऐसी कोई नुमाईश नहीं! मुहब्बत में कोई भी परेशानी जायज़ नहीं, दीवानगी में ऐसी कोई भी रवायत नहीं! कुछ ऐसी हकीकत है, जैसे सपनों‌ की शरारत है, मुस्कराते हैं ऐसे जैसे हम कोई हसीन आदत हैं चलिये हम मोहब्बत को एक नाम देते हैं दुआ दीजिये, आपको ये काम देते हैं! यूँ अपने ज़ज़बातों को अंज़ाम देते हैं,  आप हाँ करिये मोहब्बत नाम देते हैं!

भटकते रास्ते

लौट आये अनजान शहर, चंद रोज गुमनाम सहर, कुल ज़मा फिर चार पहर, भटकेंगे मन, जरा ठहर चल मुसाफिर बाकि हैं सफर और इधर, झोली बांधे बांधे ही सराय को घर कर रास्तों के अज़नबी, और अज़नबी के रास्ते, सफ़र अधुरे कितने, चंद मुलाकातो के वास्ते! पलक झपकते ही बुलावा आयेगा, हाथ आये है लम्हा, उसको ही सुकूं कर! बड़ी मेहनत से आराम करते हैं, फुर्सत में हम काम करते हैं नए हालात हैं हर मोड़ पर, हम कहाँ किसी को राम करते हैं यूँ नहीं कि हम बदलते नहीं, पर अपनी चाल चलते हैं, रुकने का वक़्त आया तो चलने का जिकर करते हैं चलते तो सब हैं क्या हर कोई मुसाफिर है? कदम मिलते हों तो क्या हमसफ़र वाज़िब है?

सफ़र-ए-ताल्लुक!

किस मोड़ पर हमसफ़र होंगे,  मैं पहुँचती/ता हूँ,  उम्मीद है आप खड़े होंगे? कितना मुश्किल है बनते हुए रिश्तों की लकीरों पर चलना एहसास को क्यों शरीर चाहिए, क्यों लम्हों के अमीर चाहिए नज़दीक आने कि तमाम मुश्किलें हैं, मोहब्बत को फकीर होना चाहिए समस्या बहने कि नहीं बहते हुए रहने कि, चलो हम बह भी गए तो साहिल क्या होगा गुजरते वक़्त को कायल क्या होगा और रुक गये तो हासिल क्या होगा "इश्क" है जाहिल तेरा क्या होगा दूरियों के सब फर्क मिटा दें तो क्या हाथ आएगा  हांसिल होगा कुछ या होंसला बढ़ जायेगा नजदीक आयेंगे या फ़ासला आ जायेगा एक होँगे या आसरा बढ़ जायेगा पहचान आप से और अपने आप से मेरे हिस्से कि जमीं, और आप कि नजदीकियां मुझे अपने फासले पसंद हैं. नज़दीक होँ  तो आपको नज़र आयें, एक रास्ते भी हैं और सफ़र भी अलग नहीं पर मोड़ आने से पहले कैसे मुड़ जाऊं. जाहिर है मुड़ने का डर नहीं, जरा मुड़ कर भी देखिये मेरे पहुँचने में जरा वक़्त है. इंतज़ार सफ़र को रोकता नहीं शायद, मुश्किल है, पर इंतज...