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संविधान वाली देशभक्ति!

सीखें, आवाज़ उठाएं, साथ आएं, चलों अपने अंदर अम्बेडकर जगाएं कोई भी खास नहीं हैं पैदाईश से बराबरी करने को कंधे से कंधा मिलाएं हर कोई खास है, जो भी पैदाईश हो, जात धर्मे के अब बहाने ने बनाएं! मैला साफ़ करता है कोई कचरा, अच्छी बात है! तो आप हरिजन कहलाएं! सीखें, आवाज़ उठाएं, साथ आएं, कहदो सब से कागज़ नहीं दिखाएं! सीखें, आवाज़ उठाएं, साथ आएं, चलो सब यकीनों के सवाल बन जाएं!! सच नहीं बदले तो नाम बदल दें? किसको शौक है दिव्यांग कहलाएं? बहुत हो गई चापलूसी हिंसा, चलो अंबेडकर वाले देशभक्त बन जाएं! संविधान ही है जो हमें बचाएगा, चलो मिल कर संविधान बचाएं!

पुकार लो हम अनेक हैं!

अपने भी हैं और इंसान भी, पहचान इतनी काफ़ी है, हाथ बढ़ाने को, कदम मिलाने को, पर ऐसा कहाँ होता है, फिर कहते हो ये देश है, शैतान का एक भेष है, दर्द दर्द नहीं होता, आँसू  आँसू नहीं, पस्त है सब इंसानियत, तराजुओं के सामने! 'अपने' ख़ास होते हैं, दबे कुचले टूटे, इंसानियत की दरारों से लीक हुए, चमत्कार के प्राण नहीं छूटे, पूरे बदन पर शिकन लिए, हम सिर्फ आज नहीं हैं सदियों का कच्चा चिट्ठा हैं, हिम्मत किसमें जो पढ़ ले? "जय भीम" ये पुकार है, के चीख, अज़ान है के कोई पहचान? चाय पर बात है, या बिन शर्त साथ है? एक टॉर्च है, बैटरी की तलाश में, जुड़िए, आप रोशनी हैं! "जय भीम" ये दर्द भी है, खुशी भी, आँसू भी, उल्लास भी, ये एक सपना है, एक कौम का, एक कौम जो इंसान होती, अगर कोई जात, कोई रंग से मानवता हैवान न होती! "जय भीम" एक सवाल है, पूछें खुद से? अपनी बुनियाद से? अपनी हैसियत से? अपनी किस्मत से? अपनी अस्मत से? आपने कमाई है? या हाथों हाथ आई है? जय भारत बोल के देखिए? दो चार आवाज़ साथ देंगी, भीड़ में ज़ज्बात देंगी, दो पल और फिर अप...