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गज़ल निस्वां !

इस ज़माने के ये चलन निराले हैं,  मर्द सारे गम के गीत गानेवाले हैं?                                       इकारार की इल्तज़ा और जोर, ता-ज़िन्दगीं साथ निभाने वाले हैं? आदम की दुनिया है, समझे हम, हव्वा है हम दिल बहलाने वाले हैं! जो भी निशान हैं हमारे जिस्म पे, कौन अपनी पहचां बताने वाले हैं? रगों में खून है ओ दिल धड़कन है, कौन सुनता किसको सुनाने वाले हैं? बेटी, बहन, बहू, मां, सब जली हैं, हम कब इनके रास्ते आने वाले हैं? दो चार हाथ ही तो मारे हैं, बाद में चांद-तारे लाने वाले हैं! न जमीं, न ही आसमां अपना है कहां इस दुनिया से जाने वाले हैं? बहुत् शरीफ़ हैं वो कैसे भूलाएं उनके एहसान सब गिनाने वाले हैं, हम फ़क्त अपने सपनों के बांझ है, गुड़्डे-गुड़िया खेल पुराने वाले हैं!   हमारे अफ़सानों का भी दौर हो, दुनिया से मर्द कब जाने वाले हैं? बात उनकी थी अज्ञात ये तो, कौन किसको बताने वाले हैं? (गज़लों के बारे में सोच रहा था, और गाने वालों के बारे में, ज्यादातर मर्द, अपने दर्द की हंसी दास्तां...

गुलाम अली!

  देशभक्ति का बड़ा तगड़ा बंदोबस्त है, नफरत के फूलो से गुलशन शगुफ्ता है! कल तक तो हम मोह्ब्बत थे, आज क्यों नफ़रत हैं, हम तो वही हैं,  किसकी ये फ़िरकापरस्त फ़ितरत है?  गुलाम अली सुनना अगर पाकिस्तान है, फिर तो इस देश में लाखों ऐसे अवाम है! हंगामा है क्यों इतना कि कोई गुलाम अली है, कितनी तंग अक्ल है कौनसे कुँए में पली है!??? ये कौन सी गुलामी है कि भीड़ में सोचना है, गुलाम अली को सुनेंगे उसी को कोसना है एक मुल्क दुश्मन है तो वहां के इंसान इंसान नहीं, इंसानियत का गणित इतना भी आसान नहीं एक इंसान सिर्फ अपना मुल्क, मज़हब, जात लगे, बड़े गरीब आजकल मुल्क के हालात लगे सुन के देख लो आप भी गुनगुना देंगे, कानों को कान रखिए क्यों वो गुलाम होंगे? गुलाम अली गाते हैं आप सुन सकते हैं, टांग अड़ाने वालों के घुटने में कान होंगे! जो डर गया सो मर गया - गब्बर सिंह किसी का अक्ल घांस चर गया - आइना! मेरे लिये तो गुलाम अली खास हैं, और कोई बातें निरी बकवास हैं!