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मौसम

मौसम ने जैसे अपना घर बना रक्खा है, तमाम रंगों से हर कोना सजा रक्खा है! पलक झपकते बदल देती है नज़ारों को, जरूरत का सारा सामान जमा रक्खा है! जब जिसको कहे वो उस रंग में ढल जाए, यूं सब से अपने रिश्तों को बना रक्खा है! कोई मुकाबला नहीं है खूबसूरत होने का, इरादों को ही अपना चेहरा बना रक्खा है! जमीं, पौधे, पानी, पहाड़, बादल, आसमान एक दूसरे को अपना आईना बना रक्खा है! इधर बादल आसमान को जमीन ले आते हैं, जमीं ने पेड़,पहाड़ों को जरिया बना रक्खा है! जिद्द क्यों हो सबकी अपनी एक जगह है, बस इंसानों ने ये तमाशा बना रक्खा है!

कश्मीर, कश्मीरियत और खामोश सवाल!

कश्मीर, मुस्कराते लोग, हँसते बच्चे, बर्फीले पहाड़, पाक-साफ़ पानी इन्तहां खूबसूरत! कश्मीरियत, जज़्बा         इरादा,         हाथ में हाथ, मुश्किल में साथ, दर्द में डूबे हालात, मुस्कराते हमसे बात, एक सवाल सिर्फ, "आप ही बताएं..." हम क्या बताएं?     

किस सूरत ....क्या खूबसूरत?

खूबसूरती क्या है, जंगल, पेड़, या सीमेंट की इमारतें!! खूबसूरती क्या है, लम्हा है कोई या जगह है, दिल आया तो बेवज़ह है?  खूबसूरती वजह है, दिल में जो जगह है, दिल छोटे हुए या जगह कम?? काटने छाँटने बाटने में लगे है, सब के सब, खूबसूरती शोपीस में रखने की  है  सनक ! इसे तरक्की कहते हैं!! पत्ते हैं, फूल हैं, हवा है, और हम, कौन किसके रास्ते आता है कहिये?? खूबसूरती कवायत है, जाहिलों को रवायत है मालिक को हामीं बाग़ी को बगावत है! खूबसूरती सफ़र है या मक़ाम है,? पंख है आपके या कैद हुई पहचान है? खूबसूरती एक दूकान है, मीठा पकवान है, रईस, धनवान है, पिस्ता डला पान है, आपका क्या दाम है??  खूबसूरती अदा है, मरीज़ को दवा है, अकेली को सजा है, साथ का मज़ा है! क्या हम सच्ची-मुच्ची जी रहे हैं, या खूबसूरती का खून पी रहे हैं! खूबसूरती हैरत है, बैगैरत है, किसी को सूरत है, किसी की सीरत है!

छान-बीन?

रिश्ते चुनते हैं‌ हम को, कि हम रिश्तों को चुनते हैं, रिश्ते बुनते हैं हम को, कि हम रिश्तों को बुनते हैं! अपने बनते हैं युँ ही, कि युँही बनते हैं अपने हैं, सुनते हैं जो  हम  कहते, या कहते हैं हम सुनते हैं नाम किसका है और क्यों खुद को सामान करते हैं, कुछ खबर है आप को युँ खुद को दुकान करते हैं! नज़र इरादों को जगाती है, उम्मीद अभी बाकी है, युँ छोड़िये फ़िक्र करना तनिक भी, अभी बेबसी काफ़ी है! लंबी उमर है क्या जल्दी है नाउम्मीदगी की,  दो-चार दिन जरा कोशिश के लुत्फ़ ले लो! उम्मीद पलती है गहरे अंधेरे कोनों में, क्या रखा है मुलायम से बिछौनो में! बुरे हालात हैं पर भी मुस्कराते हैं, जानते हैं ये सच ही झूठी बातें हैं! खामोशी सुनती नहीं, आवाज़ों ने बहरा कर दिया, मेरी सोच ने ही, मेरी आज़ादी पर पहरा कर दिया!  वही दिखेगा सामने जो नज़रिया कर लिया आंखें बंद की और अंधेरों को गहरा कर लिया! इरादे सफ़र को निकले हैं, रस्ते इबारत करने,  मुश्किलें हों भी तो रंग तजुर्बों के नफ़ासत करने! इबारत की इज़ाजत है, या की कोई हिमाकत है, अधुरे रह गये सफ़र और बस थो...

खूबसूरती

खूबसूरती क्या है...     क्या है? दिल ओर दिमाग जब एक होकर किसी मधुर सच्चाई से मिलते हैं आराम से ....निश्चिन्त होकर बिना किसी रूकावट के उस पल की खूबसूरती का एहसास क्या है? खूबसूरती...! इसके मायने जिंदगी को लाज़मी हैं पर क्या हम इस खूबसूरत एहसास की तरफ जीवंत हैं? या फिर, अपने विचारों की सुरंग में ही अपने जीवन का अंत है!   नदी, तालाब, पहाड़ों से बहता हरियाली का सैलाब इस खूबसूरती के बीच रहकर हम, अगर धुप-छाँव नहीं खेल रहे, तो क्या हम जी रहे हैं??? (जिद्दू कृष्णमूर्ति की चहलकदमी और उस से जुड़े उनके चिंतन से अनुरचित)

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खूबसूरती क्या है? क्या है .... दिल और दिमाग, जब एक होकर  किसी मधुर सच्चाई से मिलते हैं  आराम से निश्चिन्त होकर, बिना किसी रूकावट   उस पल की... खूबसूरती का एहसास क्या है ? खूबसूरती! इसके मायने जिंदगी को लाज़मी हैं पर क्या हम, इस खूबसूरत एहसास की तरफ जीवंत हैं ? या फिर अपने विचारों की सुरंग में ही, अपने जीवन का अंत है! नदी, तालाब, पहाड़ों से बहता, हरियाली का सैलाब, इस खूबसूरती के बीच रहकर, हम  अगर धुप छांव नहीं खेल रहे तो क्या हम जी रहे हैं ? (जिद्दू कृष्णमूर्ति के आलेखों से अनुरचित)