सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

presence लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मन के मौसम!

  मिल कर मन के मौसम बना रहे हैं, बादल ले कर आसमां आ रहे हैं, रंगों को कुदरत से छलका रहे हैं, ब्रशस्ट्रोक हवाओं के लहरा रहे हैं, कैनवास पल–पल बदल आ रहे हैं, ज़मीन पैरों तले पिघला रहे हैं, खड़े हैं जहां, वहीं बहे जा रहे हैं, मिल कर मन के मौसम बना रहे हैं, और वहीं हैं हम जहां जा रहे हैं! पहुंचे थे पहले पर अभी आ रहे हैं मूर्ख हैं जो वक्त से नापने जा रहे हैं, खर्च वही है सब जो कमा रहे हैं, दुनिया कहेगी के गंवा रहे हैं, और जागे हैं जब से जो मुस्करा रहे हैं!

काम की बातें

सब कुछ साथ है, जो गुज़र गई, वो याद है जो चाहिए, वो ख्वाब है , जो कहीं नहीं आपबीती है, जो सुन न सके, एक आह है, एक चाह है, एक राह है, हमेशा आपके साथ जब भी आप, चलना चाहें, कुछ बदलना चाहें! सब खूबसूरत है, मनभाए, लुभाए ललचाए, भरमाए, दिलचाहे, साथ सब का अकेलापन, तमाम बातें, अनकही, खामोशी, शोर मोहब्बत के, और अब ये दौर, नफ़रत भी मुस्कराती है, कितनों के दिल लुभाती है! अफ़सोस! चलिए कोई और बात कीजिए, कुछ हट कर, परंपराओं से, दकियानूसी विधाओं से, सट कर रहना, बीमारी है, देश को, समाज को, हम-आप को, नक़ाब पहचानने होंगे, धर्म-जात के, दूर से बात के, घर बैठे काम, आराम है, घर बैठे लाखों भुख को कुर्बान हैं!