मुहब्बत है या मिल्कियत , साथ है या सौगात , कोई सामान है खरीदा जो रहे आपके हाथ ? रहे आपके हाथ बस , बात उतनी ही कीजे , लगे सुनाने चार , जो मुरख को मौका दीजे ! जो मूरख बोले बात वो गांठ के लीजे , कल के मुर्दे गाड़, आज ठाट कर लीजे बड़े ठाट से घुमे , झुमे चार चौबारे , थे वारे न्यारे सच, जो अब कड़वे सारे कड़वे पड़ गये सच तो जरा चाट के लीज़े , है काम की चीज़ बड़ी , जरा बाँट कि लीजे ! लगे बाँटने चोट ये इश्क में कैसी फ़ितरत , प्यार कहे थे कभी , अभी ये कैसी नफ़रत नफ़रत नहीं इलाज़ जख्म को मलहम कीजे , लंबा है सफ़र वज़न ज़रा हल्का कर लीजे ,
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।