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खाक मोहब्बत!

मुहब्बत है या मिल्कियत , साथ है या सौगात , कोई सामान है खरीदा जो रहे आपके हाथ ? रहे आपके हाथ बस , बात उतनी ही कीजे , लगे सुनाने चार , जो मुरख को मौका दीजे ! जो मूरख बोले बात वो गांठ के लीजे , कल के मुर्दे गाड़, आज ठाट कर लीजे बड़े ठाट से घुमे , झुमे चार चौबारे , थे वारे न्यारे सच, जो अब कड़वे सारे कड़वे पड़ गये सच तो जरा चाट के लीज़े , है काम की चीज़ बड़ी , जरा बाँट कि लीजे ! लगे बाँटने चोट ये इश्क में कैसी फ़ितरत , प्यार कहे थे कभी , अभी ये कैसी नफ़रत नफ़रत नहीं इलाज़ जख्म को मलहम कीजे , लंबा है सफ़र वज़न ज़रा हल्का कर लीजे ,