गर्मी में बारिश की झलक, नेक इरादॊं के फलक खुदगर्ज़ मन की दुआ, कुछ देर तलक, कुछ देर तलक और चंद लम्हों तलक, झपक न जाये पलक बिरली सच्चाई है देर उतरेगी हलक खुदगर्ज़ मन की दुआ, कुछ देर तलक, कुछ देर तलक सुन के बादल कि गरज, जाग उठती है ललक कौन जाने असर दुआ का है, या मर्ज़ी ए मलक खुदगर्ज़ मन की दुआ, कुछ देर तलक, कुछ देर तलक हम अकेले नहीं, कहती है पंछी की चहक सर हलाती हैं जमीं, भेज मट्टी कि महक खुदगर्ज़ मन की दुआ, कुछ देर तलक, कुछ देर तलक कान में बारिश की टिपक, पत्तों पे बुंदों की चमक, हर सांस इशारे से, कहती है ज़रा और बहक खुदगर्ज़ मन की दुआ, कुछ देर तलक, कुछ देर तलक
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।