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सर्दी और सुबह!

फिर आ गयी सिरहाने से, एक सुबह जाग उठी है! आज सुबह बस आई सी है, कुछ ज्यादा अलसाई सी है! छुट्टी मांगी नहीं मिली, सूरज की भी नहीं चली! गुस्से से लाल पीला है, जागा अभी अकेला है! पुरे दिन पर सुबह छलकी पड़ी है, धुप तेज पर सर्दी को हल्की पड़ी है! सर्द रातों को सबक सिखाने, बद्तमीज सुबह जरुरी है?  सर्दी में सुरज की बदतमीजी बड़ी हसीन है, बेशर्म हो कर ज़रा धुप को छू लेने दीजे!! सुबह शाम है और दिन रात भी, सब कुदरत है और करामात भी!

बादल बारिश मौसम

दिखती नहीं है बारिश पर छू जाती है, चलो वहां रुकें .. सही में कहीं दूर से,  जैसे अनजाने सुरूर से, आया कितने गुरुर से, बादल वहीं पे, सबको  सरोबर करके  हसीं कारोबार करके उदास होते, लम्हों को प्यार करके बारिश  है कहीं, हाथ में डोर लिए,  अपना सच छाप के, अपना रास्ता नापते, मौसम झट से , कल को छोड़ के,  होकर नये मोड़ पे, सब के सच बदलती जमीँ