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हमारी सरकार - एक आत्मकथा!

हाथ पांव में दम नहीं हम किसी से कम नहीं बॉर्डर पर कुछ उठापटक हमको उसका गम नहीं, मर गए मासूम जवान, घड़ियाली आंसूं हमरे भी सच में आंखें नम नहीं? हम पहले ही बोले थे आज लड़ने का मन नहीं! बोलने में हम सबसे आगे, करने धरने का दम नहीं, धर्म के नाम के धंधे सब उसमें कोई सरम नहीं, फल की चिंता हम न करते, इसलिए कोई करम नहीं, काम चल जाएगा झूठ से, इसमें हमको भरम नहीं! ताक़त ही सर्वेसर्वा है, दिल के हम नरम नहीं! पत्रकार सब पालतू पिट्ठु सो कब्ज़ा सच पर कम नहीं! बहका दे सब पब्लिक को, इस बारे कोई वहम नहीं, विरोध को ही खरीद लेते, पूछो, किसकी ज़ेब गरम नहीं? मजबूर की क्या मदद करना, अबे! हमको काम कम नहीं? काल मरे से आज मर, आज मरे सो अभी! हाथ पे हाथ धर मंत्रीगण, चमड़ी मोटी कम नहीं! वादे झूठे थे सब के सब हमारा निठ्ठलापन नहीं,  आप मान कर सच बैठे,  मूरख आप कोई कम नहीं!

बी बहार!

कैसे हम भुला दिये कश्मीर की पुकार!?  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!  दिल्ली वाले सोचते हैं ये आखिरी प्रहार  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!    in क्या इरादा मुल्क जो करता है ज़ुल्म बार बार!  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!  दिन नहीं गिनते पर उस दिन का इंतजार,  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!    परेशां है अम्मी, मुस्कराते बच्चों को देती पुकार,  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!  वर्दी की मनमरजी है, जमहूरियत तार-तार  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!  बोलने पर बंदिशें और सुनने को नहीं तैयार  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!!  देख हाल हमारा हंसते है, आप हैं बीमार  वन्द (च)साल: शीन गाल: बी ए बहार!! 

भागते रहो!!

चारों तरफ पहरा है, बंदोबस्त, जबरजस्त एक पूरे मुल्क की ताकत, कर रही है हिफाज़त? चौबीसों चौकन्ने, तीसों होशियार, क्या मज़ाल किसी की, ख़बरदार! सुई पटक सन्नाटा, बेहिसाब असला, कहाँ कोई मसला? इसे कहते है ताकत, लोकशाही की, चप्पा चप्पा मुस्तैद, सबका साथ, सबका हिसाब! कश्मीर! एक जेल! कश्मीरियों के लिए! वाह! भारत सरकार! वाह! जहां चाह, वहां आह! मासूमियत बेपनाह!

अखंड नीयत!

पहरा तो गहरा है, हर कोने पर शक खड़ा है, हर गली में बदनियती पहरा देती है, कितना भी नेकनियत निकलिए, खौफ़ गश्त लगा रहा है, बदसलूकी रोज़ का मौसम बनी है, हाथ उठते है, और गरेबाँ हो जाते हैं, वो कहाँ मर्द औरत में फ़र्क लाते है? आखिर अखंड भारत के नुमाइंदे है, शायद ये संविधान के कायदे हैं, बराबरी!

जन्नत कहाँ?

सुना है सब आतंकी हैं, इस जगह! हर एक शख़्श! बच्चा, बूढ़ा, आदमी औरत, और एल जी बी टी क्यू!? क्यूँ?? यहाँ की हवा में शायद, कोई बात हो! क्यों? कश्मीर! वही जगह दुनिया की, "अगर जन्नत है तो यहीं, यहीं, यहीं है" कश्मीरी भी वही हैं? वादियां भी वही, वही बर्फ, वही चिनार, वही डल, वही हज़रतबल! फिर बदला क्या है? हवा में, क्यों बारूद घुल गया है? सबकी नसों में कड़वाहट घोलने वाला! ये ज़हर कब मिल गया है? ये ज़हर आया कहाँ से? कौन है जो बदलाव नहीं बदला बोलता है?

पत्थर और बंदूक !

पत्थर और बंदूक की बातचीत पत्थर - (खामोश) बंदूक - (तड़, तड़, तड़....) पत्थर - ...... बंदूक - हम कानून हैं? पत्थर - हम मासूम हैं! बंदूक - तड़ तड़ तड़ पत्थर - हम ज़ज़्बा हैं! बंदूक - हम कब्ज़ा हैं!! पत्थर - क्यों, क्या, कैसे? बंदूक - तड़ तड़ तड़ पत्थर - अब हम चुप नहीं रहेंगे! बंदूक - हा हा हा....तड़ तड़ तड़ बंदूक - हम इंसाफ हैं पत्थर - इसलिए तुम्हें हर खून माफ़ है? बंदूक - ख़बरदार पत्थर - मौत से? या ज़िन्दगी से? पत्थर - आज़ादी बंदूक - घुटने टेको...तड़ तड़ तड़ बंदूक - तुम आतंकवादी पत्थर - ज़मीं है हमारी! पत्थर - क्यों बलात्कार? बंदूक - हमारे सच, हमारी सरकार पत्थर - दो ही मौसम हैं यहां ,             बंद और न बंद! बंदूक - ज़मीन सुंदर है, और लोग टाट-पैबंद पत्थर - हमारी चीखें हैं , बंदूक -  पैलेट आपका मरहम पत्थर - चुप नहीं करा सकते! बंदूक - "आतंकी है" तड़ तड़ तड़ पत्थर - फेक एनकाउंटर  बंदूक - हमारा तंत्र, सच हमारा पत्थर - कश्मीर हमारा है! बंदूक - जिसकी ताकत उसकी जमीं(लाठी की भैंस) पत्थर - कश्मीर...

आंखों में, आंखों से...

रोज  जीते हैं, और मरते भी रोज़ हैं, अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख मिलाएं कैसे? सब जान कर, देख कर, न माने कैसे, और मान जाएं कैसे? अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख मिलाएं कैसे? जो 'है', वो 'था' अपने अकेले हैं और सब के साथ, क्या है हमारे हाथ? खाली हैं, तो क्या फैला दें? कोई वज़ह तो हो, खुद की पीठ ही सहला लें? मजबूर हैं पर मंज़ूर नहीं हैं, अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख मिलाएं कैसे? अपनी ही आह कब तक सुनें, कौन से दर्द चुनें, अपने या अपनों के? अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख मिलाएं कैसे? मुमकिनियत,  रवैया है या लतीफ़ा हौंसला बढाएं किसका किसकी पीठ सहलाएं? अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख कैसे मिलाएं? क्या तबीयत,  क्या तर्बीयत,  क्या हुकूक, क्या हक़ीकत,  हमारी वज़ा क्या है ओ रज़ा क्या है? बताएं? किसको,  कैसे  ?   अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख मिलाएं कैसे? टूटे काँच, बंद दरवाजे, गुमशुदा, साँसें या लाशें? हर कदम पहरा, शक गहरा, आईनों पर हरसू पहरा! अपनी ही आंखों में, आंखों से, आँख ...

नाम - लड़की

नाम - लड़की जगह - कश्मीर  उम्र - कोई ठिकाना नहीं देश - घर के बाहर खड़े AK-47 (या वैसा ही कुछ) आर्मी वालों से पूछ कर बताउं?  जन्म दिवस - रोज़! अगर जिंदा बच गए तो तालीम - झुठी, गुमराह करने वाली (स्कूल की)      -----  144, कर्फ्यू, तलाशी, ताकत, बेइज्जती,  शौक - इज्ज़त, आज़ादी, आईने से आँख मिलाना घर में कौन कौन है - है या था? मौज़ूद या मिसिंग?  दोस्त - ज़िंदा या मुर्दा? स्कूल में या अस्पताल में? कोई सपना - 'दिन का?' - रात में चैन की नींद                    'रात का?' - "कश्मीर" आप किस बात से मुतासिर हैं, प्रेरित हैं?  -  कश्मीरियत पाँच साल बाद आप अपने आप को  ? पाँच साल? पहले दे दीजिए, पाँच साल? एक दिन ही दे दीजिए?