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सुमित सुमीत!

कथनी से करनी बड़ी, कहे दास कबीर, यूँ प्यार से नफ़रत जीते वो ही सच्चे वीर! वो ही सच्चे वीर कि जो दर्द हो जाएं, आँसू जिनके चोट का मलहम बन जाएं! बने चोट का मलहम चलो ये रीत चलाएं, नफ़रत के मारों के चलो सुमीत बन जाएं! बनें सुमीत सब ऐसे कोई न पड़े अकेला, इस दुनिया को करे बहनचारे का खेला! बहनचारे का खेला नहीं सिर्फ़ ये भाईचारा, शामिल हों इसमें सब, नहीं खासा-प्यारा!  हर कोई खासा-प्यारा यही तो है मानवता, यकीन मानो है हम सब में ये क्षमता! क्षमता कितनी हम सब में ये न पूछो, बुद्ध हुए अपने ही बीच, कबीर सोचो!! (एक इंसान से मुलाकात हुई, बात हुई, इंसानियत पर हुए ज़ख्मों का दर्द उनकी आंखों में नज़र आया, वो भी एक डर होता है जो हाथ आगे बढ़ाता है गले लगाने के लिए, ये बात समझ मे आई)

आभा और एक शोध ☺

एक सवाल है, जिंदा, संजीदा, नाज़ुक, नमकीन वजन भी है सृजन भी है, यूँ ही नहीं खड़ा, जिद्द पर नहीं अड़ा, पर ख़त्म नहीं होता, आप नहीं तो कोई और सही, कोई और नहीं तो कोई और सही, सवाल आप का भी शायद, और हमारा भी, अंजान मंज़िलों के मुसाफ़िर का, सहारा भी, सवाल हों, तो रास्ते खत्म नहीं होते, न उम्मीद थकती है, न हौसला पस्त होता है,  सवाल की लाठी एवरेस्ट तक ले जाती है, और सवाल समन्दर के तल से लेकर, चाँद के कल तक ले जाते हैं, सवाल सिर्फ सवाल होते हैं, मुश्किल या आसान, ताकतवर या कमज़ोर, साथ में या ख़िलाफ़त करने, प्यार या दुत्कार, ये आप के ऊपर है, सवाल धुरी हैं, न हो तो हर बात अधूरी है, और कमाल देखिये सवाल क्या चाहते हैं? उनकी क्या मांग है? दिल सवालों का क्या चाहे?... एक खोज, कब क्या क्यों? एक रास्ता, कहाँ, एक शख्श - कौन हर पल एक सवाल हर लम्हा एक शोध, शोध! अभी और क्या? सवाल को और क्या बेहतर साथ हो, एक उम्मीद हो, एक प्यास हो, एक साज़ हो, एक सोज़ हो, मुबारक आपको अभिशोध हो! (Abha for your spirit, for your quest, for y...