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किसका खेल?

  सब साथ के खेल हैं, जाने-अंजाने  चाहे– अनचाहे, गाहे–ब– गाहे  सवाल ये है, कि  आप कैसे खेल रहे हैं? दुनिया की चाल चल, फेल रहे हैं? . या, अपनी मर्जी से मेल रहे हैं? आप काफ़ी हैं या कम? आइने क्या बोल रहे हैं? तराजू किसका है और, किस हाथों तौल रहे हैं? सुना होगा,  दुनिया एक होड़ है, चूहे वाली दौड़ है, लगे रहो, एक दो एक, एक दो एक... सवाल ये है कि  चाल किसकी है ? आप चुन रहे हैं मोड़, या रस्ते आपको मोड़ रहे है? आप खेल रहे हैं, या खेल किसी और का, आप झेल रहे हैं? आप कैसे खेल खेल रहे हैं?

पनपने के सच – जवानी

बचपन पनपता है, जवानी मचलती है बुढ़ापा ठहरता है, जवानी में दिल बहुत मचलता है, मर्जी के रास्ते चलता है, अक्सर पिघलता है, अपने बस में है, पर बस कहां चलता है? जवानी जोश है, एक पुकार है, जिंदाबाद! जवानी तूफान है, कहां कोई थाम है, मुश्किल आसान है! बेलगाम है, एक ललक है, और लालच भी, उस हर ताकत का, जो लगाम लिए खड़ा है, क्योंकि उसे तूफान चाहिए, काम अपना आसान चाहिए! दुनिया को तूफान चाहिए, पर अपने लिए आसान चाहिए, इसलिए बना दिया है, उम्र बढ़ने को एक जंग, हमेशा चलने वाली लड़ाई, पहला नंबर आओ, पीछे रह गए तो और जोर लगाओ, आगे निकल गए तो, किसी की शाबाशी के गुलाम बन जाओ! लगे हैं सब नंबर वन होने में, ज्यादा हैं आप किसी के कम होने में? जवानी, खर्च होने की चीज़ नहीं तो गौर करिए, कोई आपको कमा तो नहीं रहा? नंबर – एक दो तीन गिनती बना तो नहीं रहा? बेलगाम रहिए, बेनाम सही, नाम होगा तो बिक जायेंगे, कामयाबी कांटा है मचली बाजार का, जवानी मचलती है, कैसे खुद को बचाएंगे?

पनपने के सच - बचपन

बचपन पनपता है, जवानी मचलती है, बुढापा ठहरता है! चलो बचपन पर लौट चलें, जम कर, जोश से, फूलें–फलें! अपना ही रास्ता बनें, बुनें! खिलना है, खुलना है, तमाम सच बदलना है हाल के, हालात के, उनसे जुड़े सवालात के, नज़रअंदाज़ जज़्बात के! पूछ लें वो सब सवाल जो डरे हुए है, क्योंकि बड़ों के जमीर मरे हुए हैं! उठा लें वो कदम जिसके नीचे की जमीन मालूम नहीं है, रास्ते ऐसे ही बनते हैं! आ जाएं साथ,  वही है बचपन की बात, कहां उसमें, दूसरे को कम करती मज़हब और जात? पनपना, फक्त जिंदा रहना नहीं है, बचपन की चाल चलिए खिलिए, खुलिए,  मिलिए हर पल से ऐसे जैसे ये पहली बार है, खेलिए, नौसिखिए बन, कुछ गलत नहीं, सब सीखने के नुस्खे हैं! दिल बचपन करिए, ज़िंदगी में जरा सचपन कीजिए! कोई द्वेष नहीं, घृणा नहीं, सब खेल हैं, मिलने के, दुनिया से,  उमंग से, चहकते हुए, साथ को बहकते हुए, जब तक है, तब है सौ फीसदी ! फिर कुछ और, या कुछ नहीं! न अपेक्षा , न उपेक्षा चलिए बचपन चलें?

LOVE

Love is an act, Even when it reacts, Its a step,  A step to reach out, to embrace, the possible,  within each of us, and the possible, becomes an act, when a hand reaches out, to hold,  to mold,  the other into one, one with each, the human, the living, the elements wind, fire, water, earth, space, each holding all as one that is the being, that is the message Love Is what holds  all as one.

याद रखना भूल है?

पैर के छाले हों, या खाली निवाले हों, लूट गए रास्ते में,  घर बैठे बेघर हो गए, जिस जमीन को सींच रहे थे बंजर वहां के मंजर हो गए, सब याद रखा जाएगा! उधर सफ़ूरा जेल में है, बरबाद वक्त को समझाती हुई कल फ़िर आएगा क्या भुला रही है सरकार वो याद रखा जाएगा! बचपन के खेल,  कंधे पर सवार, या सूटकेस सवार,  रोटी की गुहार, मां लाचार,  हाथ फ़ैलाए, करे पुकार हक़ जो भीख बन गयी वो याद रह जाएगा! ट्रेफ़िक सिग्नल वर्दी का इशारा जवान खून उबल गया,   ज़रा आगे निकल गया चालन नहीं कटा,  पत्ता कट गया,  कानून अपनी कर गुजर गया, सब भुला दिया जाएगा क्योंकि बात कश्मीर है  कन्याकुमारी नहीं! पिंजरा तोड़, सलाखों के पीछे हैं,  इंसाफ़ साथ में कैद है,  सही-गलत में भेद  न्यायपालिका खेद  दलील में छेद,  और एक कानून  फ़िर एक बार  पिंजरा तोड़, सलाखों के पीछे क्या याद रखें, क्या सीखें?

गुनहगारी कानून!!

मामूली है जो बो ही ख़ास भी है, आसमाँ में भी है आसपास भी है! हलक फूटे हैं हलाक के डर पर भी।    जो घुटन है वो आज तड़प भी है! हलाक - destruction,  slaughter फिक्र है जो वो बेफिकरी बनी है! सवाल है जो वो ही उम्मीद भी है!! सर फूटे हैं और सुर मिल रहे हैं! जहां दर्द है वहीं सुकून भी है!!  (हम देखेंगे, लाज़िम है के हम भी...) बांट दिया इतना के अब साथ खड़े हैं तरतीब में है जोश, वो ही जुनून में भी! ( तरतीब-in order) समझ है बहुत पर होशियार नहीं थे? वार करते हैं क्योंकि तैयार नहीं थे, वुजूद है जो वो ही बावुजूद भी है? जो कानून है वो ही गुनाह  भी है! बेड़ियाँ उनकी क्यों हमें मंजूर हैं? जो कन्याकुमारी वो ही कश्मीर भी है?!

मुसाफ़िर-संगी-साथी!

इमरोज़   एक और लड़ाई है , अब इसका नाम पड़ाई है ! मैदानों में खड़े होकर , अपनी हिम्मत से बड़े होकर , चड़कर सीड़ियाँ , जो कभी तो नज़र नहीं आती ! और कभी लोग तोहफ़े में देते हैं , यकीन है हमेशा से , कभी मेरा , कभी लोगों का मुझमें , जो अकेला नहीं होने देता , हमेशा साथ है , कभी मेरा जुनून , कभी मेरी जरुरत , जुड़ने की , अपने से , और सच्चाईयों से जो जरूरी हैं , सब की जगह है दुनिया में , और सबके हिस्से आसमान मिलेंगे , सफ़र अभी ज़ारी है सैम और सैरा (Sam and Sarah) का , थकना सिर्फ़ एक विचार है , साथ ले कर निकलें वो अचार नहीं , और रुकना एक भ्रम , क्योंकि साँस चलती है , और उसके बाद . . . कही - सुनी बातें मत करिये , क्या सपने नहीं‌ आते ? आँखों‌ देखा सच होता है , कहते हैं ना , जवानी आती उम्र के साथ है , और जाती है इरादों से , यानि , कम होने से , और सच कहें तो सफ़ेद बालों की जवानी , उसका कोई सानी नहीं , जोश , जुनून और समझ , जो आपको नज़र देती है , सिर्फ़ नज़रिया नही , तो चलिये , जिंदगी से ...