सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

let go लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जाने दो!

"ऐसे कैसे जाने दें" ये सोच न आने दें रोकें अपने आप को टोकने से और कदमों को जाने दें आगे गहराई है, डूबने, चढ़ने की, सच्चाई है, कड़वी लगाम नहीं, चाल बदलना, रणनीति है, न की 'हाथ खड़े' न ही 'चिकने घड़े' मढ़ें, अपने सच, गढ़ें नहीं, लड़े नहीं अपने रस्तों से, बदलें, गिरें संभलें मुड़ें, जुड़ें, क्षितिज से वहाँ जहाँ होती है ज़मीन आसमान आसमान ज़मीन सच सही गलत अच्छे बुरे बीच घुटे नहीं! आपकी राय, एकतरफ़ा हो जुटे नहीं, नकारने सपना, दमतोड़ता कोने में आपके दिल के, "जाने दो" ये सोच न आने दो!

खाक मोहब्बत!

मुहब्बत है या मिल्कियत , साथ है या सौगात , कोई सामान है खरीदा जो रहे आपके हाथ ? रहे आपके हाथ बस , बात उतनी ही कीजे , लगे सुनाने चार , जो मुरख को मौका दीजे ! जो मूरख बोले बात वो गांठ के लीजे , कल के मुर्दे गाड़, आज ठाट कर लीजे बड़े ठाट से घुमे , झुमे चार चौबारे , थे वारे न्यारे सच, जो अब कड़वे सारे कड़वे पड़ गये सच तो जरा चाट के लीज़े , है काम की चीज़ बड़ी , जरा बाँट कि लीजे ! लगे बाँटने चोट ये इश्क में कैसी फ़ितरत , प्यार कहे थे कभी , अभी ये कैसी नफ़रत नफ़रत नहीं इलाज़ जख्म को मलहम कीजे , लंबा है सफ़र वज़न ज़रा हल्का कर लीजे ,