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भारत माँ की.....

भारत माँ की बेटियों को पेट में मारा जाता है, जय भारत माँ की जमीं पर जीवन उगाने वाले आत्महत्या कर रहे हैं, जय भारत माँ की, साँसे फूलती हैं तरक्की के धुँए से, जय भारत माँ की, औकात एक मज़हब, एक भाषा तक सिमटा दी, जय भारत माँ की, बेटियां बाज़ार में जिस्म बेचती है, और बेटे खरीद रहे हैं, जय भारत माँ की, ठेकेदारी, गुंडों के हाथ पड़ गयी है, जय भारत माँ की, इंसानियत एक जात है, यहां पैदा होना अपघात है, जय भारत माँ की, रसोई एक अखाडा है, गाय ने इंसान को पछाड़ा है, जय भारत माँ की, शिराएँ (नदीयाँ) श्री नाला बनी है, शंकर को रवि का श्राप लगा है, जय भारत माँ की, औलादें, सड़क किनारे और स्टेशन प्लेटफॉर्म पर बीड़ी मारती और डंडे खाती हैं, जय क्या आप को अब भी लगता है? भारत एक माँ है? या ये कहना गुनाह है? आपकी भी जय!!

मर्द के दर्द!

कौन कहता मर्दों को दर्द नहीं होता , हम बस बयाँ नहीं करते , पैरों के बीच , ... वो . . . मतलब . . . यानि . . . न न ,  दिल में छुपा रखते हैं , खुद ही दारु - दवा करते हैं , थोड़े अंधेरों को हवा करते हैं , पर क्या करें ये खुजली कि बीमारी है , आप तो समझते ही होंगे , ( मतलब देखेते ही होंगे ) क्या करें कंट्रोल ही नहीं होती , और लातों के भूत , हाथों से नहीं मानते , अब आप को समझना चाहिये न . . . सामने क्यों आते हैं , सदियों से यही होता आया है , पेड़ , पहाड़ और औरत , इन पर चढ कर ही हम मर्द होते हैं , ये मत समझिये हमें दर्द नहीं‌ होता , अब हम तो मानते हैं , हमसे कंट्रोल ही नहीं होता , और फ़िर हम भेदभाव नहीं करते , 6 महीने की बच्ची , 60 साल की बूढी , स्वस्थ , सुंदर या अंधी - गुंगी , अमीरी से ढकी या गरीबी से नंगी , नोचते वक्त हम रंग नहीं देखते , और देखना क्या है ,  ज़ाहिर है , प्यार अंधा होता है , और उसी का धंधा होता है , बस सप्लाय कम है , ड़िमांड़ ज्यादा , वैश्वियकरण की नज़र से देखिये समस्या आसान है , ...