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हम काफ़िर!

हम काफ़िर हैं झूठे यकीनों के, दीवारों में चुनने के काबिल हैं क्या? अकीदत और इबादत के गैर हैं हम, आपकी दुआओं से खैर हैं क्या? सजदा करें इतनी अना नहीं हममें,  ख़ाक से पूछिए ख़ाकसार है क्या? अपने गुनाहों को गंगा नहीं करते, जो एहसास न हो वो वजन है क्या? "जय श्री" जोश में कत्ल कर दें कोई आप ऐसे कोई अवतार हैं क्या? भक्त भीड़ बन गए हैं तमाशों की, सारे अकेलों की कहीं भीड़ है क्या? हम मुसाफिर हैं तलाश तख़ल्लुस है, ज़िंदगी मज़हब के वास्ते है क्या?

कत्ल–ए –ख़ास!

हिन्दुस्थान ने भारत का कत्ल कर दिया, हथियार पर धर्म की धार थी, जय श्री जय श्री उसकी ललकार थी, जुबां पर खून तो पहले ही चढ़ा था, बहती गंगा में सब ने हाथ लाल किए, सवाल पूछने वालों के गले कमाल किए मिठाइयां बंट रही हैं, जश्न मन रहे हैं, भक्ति के नए मतलब निकल रहे हैं, अहंकार से अब भगवा मल रहे हैं, हरे को हरी के रंग में ढाल दिया है, हिंदुत्व ने बड़ा कमाल किया है!!

मारें या बचाएं?

सुना है, मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है, फिर क्यों किसी को जलाने सारा जमाना खड़ा होता है? बुराई पर अच्छाई की जीत? या अपने धर्म, जाति की प्रीत? कभी रावण, कभी पहलू, कभी रोहित, कभी महिषासुर कभी डेल्टा, कभी सुपर्णखा, कभी चुड़ैल, कभी कलमुँही! जिसकी ताकत, उसका सही, दौर कोई हो कहानी वही? शोर, धमाका, आतिश, धुआँ, धुंधला सच, अंधा कुआँ, पहले राम, अब श्री, देव, आसा, रहीम सदगुरु, हो जा शुरू नीम हक़ीम, सब नामचीन! सब मुश्किलों का हल, हर मर्ज के दवा, पालतू ...., खरीदे गवाह, आप क्या यकीन करते हैं? क्या आपके प्रश्न भी चढ़ावा हैं, आपकी भी कोई साध्वी, कोई बाबा हैं? आपके विकल्प, आपके प्रश्न, क्या लंका दहन हैं? आपकी सोच आपके माथे के साथ टिकी है? किसी मंदिर की ड्यौढ़ी पर लाइन में खड़ी है? सवाल खत्म सिर्फ शिकायत है? क्या आपकी मेहनत को मन्नत की आदत है? 101, 1001, सोने का मुकूट, या पानी चढ़ा, आपकी औकात से थोड़ा बड़ा? क्योंकि भक्ति सबूत मांगती है? सोई है अंतरात्मा, देखें कब जागती है?