ख़्वाब में ख़्वाब को सच होते देखा, दूर थे फिर भी बहुत नज़दीक देखा! जब भी देखा उनको बड़ा मसरूफ़ देखा, कभी खुद को देखें, कभी मेरी तरफ देखा, जब भी देखा यकीनन गौर से देखा, कौन जाने आशिक कि गुनहगार देखा, जब भी देखेंगे तो मुस्करा देंगे, इस उम्मीद में एक उम्र देखा, नज़दीक से गुजरे ओ बड़ी दूर थे, समझ न आये उस अंदाज़ से देखा आइनों की जुबाँ कब सीखि है, ओ हम से ही पूछे हैं ऐसा क्या देखा, उनको देखा तो हरदम हंसी देखा, खुद को देखा तो हरदम यकीं देखा! हम देखते ही थे की उसने हमको देखा, समझ न आये, ‘देखा’ कि देखते देखा! उनकी नज़र से जब खुद को देखा, फ़िक्र देखी, फक्र देखा, असर देखा
अकेले हर एक अधूरा।पूरा होने के लिए जुड़ना पड़ता है, और जुड़ने के लिए अपने अँधेरे और रोशनी बांटनी पड़ती है।कोई बात अनकही न रह जाये!और जब आप हर पल बदल रहे हैं तो कितनी बातें अनकही रह जायेंगी और आप अधूरे।बस ये मेरी छोटी सी आलसी कोशिश है अपना अधूरापन बांटने की, थोड़ा मैं पूरा होता हूँ थोड़ा आप भी हो जाइये।